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July 7, 2026

हरीश रावत ने कहा- चेहरा घोषित करो, चाहे प्रीतम हों या डॉ. इंदिरा हृदयेश, खुद जताई अनिच्छा

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत ने एक बार फिर वर्ष 2022 के चुनाव के लिए उत्तराखंड में मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने की मांग कर डाली। उन्होंने कहा कि चेहरा कोई भी हो सकता है। यदि प्रीतम सिंह या डॉ. इंदिरा हृदयेश का नाम घोषित होता है तो उनका भी स्वागत करूंगा।
हरीश रावत सोशल मीडिया में कांग्रेस में मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने की पिछले दो दिन से पैरवी कर रहे हैं। उनका कहना है कि एक बार स्थिति साफ हो जाएगी तो कार्यकर्ता पूरी ताकत से साथ चुनाव की तैयारी में जुटेंगे। साथ ही गुटबाजी में रोक लगेगी। उनकी इस पैरवी का कुछ कांग्रेसियों ने समर्थन नहीं किया। आज फिर उन्होंने एक पोस्ट डाली। इसमें कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह के साथ ही नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश का नाम भी उछाल दिया। साथ ही संकेत दिया कि वह सीएम की दौड़ में शामिल नहीं होने वाले हैं। उन्होंने कहा कि-
श्री प्रीतम सिंह सेनापति हैं। यह बहुत स्तुत्य कथन है। उन्हें पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किये जाने का अनुरोध है। मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में इंदिरा हृदयेश जी का भी स्वागत करूँगा। मैंने अपने नाम को लेकर जो असमंजस है उसको समाप्त किया है। देवेंद्र जी ने जो आदर दिया है, मैं उसके लिये उनको बहुत धन्यवाद देना चाहता हूं। लेकिन मुझे सामूहिक नेतृत्व की पंक्ति से हटा देने की कृपा करें, कुछ समय व्यक्ति को उन्मुक्त भी रहना चाहिये।
मैं उसी दिशा में बढ़ते हुये राजनीति के बल पर धन कमाकर अब प्रदेश की राजनीति पर कब्जा जमाने की प्रवृत्ति के विरूद्ध जन जागृति जगाने का काम करना चाहता हूँ। मेरे लिये निरंतर यह देखना भी कष्टकारक है कि कांग्रेस संगठन एक होटल की चार दिवारी में कैद होकर न रह जाय। मुझे कार्यकर्ताओं और स्वराज आश्रम की गरिमा को भी पुनः स्थापित करना है। फिर कभी-कभी कुछ नाम बोझ हो जाते हैं। 2017 में कुछ ऐसी स्याही से मेरा नाम लिखा गया जो कांग्रेस के ऊपर बोझ बन गया। मैं,कांग्रेस को पापार्जित धन की स्याही से लिखे गये नाम के बोझ से भी मुक्त कर देना चाहता हूँ। संयुक्त नेतृत्व में भी ऐसे नाम का बोझ पार्टी पर बना रहेगा।
इससे पहले उन्होंने कल भी एक पोस्ट डाली थी। इसमें लिखा था कि-
चुनाव के वक्त कोई असमंजस न रहे, एक नाम को आगे कर हम सब उसके साथ चलें। इस भावना से दिये गये मेरे ट्वीट को लेकर कुछ दोस्त यह कह सकते हैं कि हमारी परंपरा चुनाव के बाद नेता तय करने की रही है। ऐसा सब राज्यों में नहीं हुआ है। पंजाब, हरियाणा, मध्यप्रदेश, केरल व दिल्ली और कई राज्यों में हमने स्पष्ट चेहरा घोषित किया और चुनाव लड़े। अधिकांश स्थानों पर अच्छे रिजल्ट रहे और फिर परंपरा हमारी बनाई हुई है, स्थितियों को देखकर आप बदलाव ला सकते हैं और लाना चाहिये।
उन्होंने कहा कि-इधर भाजपा ने चुनाव को एक राजनैतिक घटना के स्थान पर राजनैतिक महा युद्ध में बदल दिया है, इसलिये कमांड लाइन बिल्कुल स्पष्ट होनी आवश्यक हो गई है। उत्तराखंड में इस समय भाजपा के विरोध में हमें अपना चेहरा घोषित करना आवश्यक है, ताकि मतदाता तद्नुसार अपना मन बना सकें।