आगे जरूरत पड़ी तो कृषि कानूनों को फिर से बना सकती है सरकारः राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र
राजस्थान के राज्यपाल और बीजेपी के नेता रहे कलराज मिश्र ने कहा है कि भविष्य में सरकार दोबारा कृषि कानून ला सकती है।
तीन कृषि कानूनों को वापस लेने के पीएम मोदी के ऐलान के बाद देशभर में अधिकांश भाजपा नेता चुप हैं। उन्हें सूझ ही नहीं रहा कि इस पर क्या बोलें। वहीं, कुछ लोग इस पर राय भी दे रहे हैं। इसी बीच राजस्थान के राज्यपाल और बीजेपी के नेता रहे कलराज मिश्र ने कहा है कि भविष्य में सरकार दोबारा कृषि कानून ला सकती है। उत्तर प्रदेश के भदोही में उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने कृषि कानूनों पर किसानों को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं माने। इसलिए सरकार ने कानूनों का वापस लेने का फैसला किया है। आगे इसकी जरूरत पड़ी तो सरकार फिर से उन्हें दोबारा बना सकती है।राजस्थान के गवर्नर ने कहा कि कृषि कानूनों को लेकर किसानों को समझाने का प्रयास किया गया। सकारात्मक पक्ष रखने की कोशिश की गई, लेकिन किसान आंदोलित थे। वे इस बात पर अड़े हुए थे कि तीनों कानून वापस लिए जाए। आखिर में सरकार को लगा कि कानून वापस लिया जाय और फिर दोबारा इस संबंध में कानून बनाने की जरूरत पड़ी तो किया जाएगा। फिलहाल इस वक्त किसान कानून वापस लेने की मांग कर रहे हैं तो वो ले लेना चाहिए। उन्होंने शालीनता के साथ वापस लिया है। मुझे लगता है कि यह अच्छा कदम है। उचित निर्णय ही सरकार ने लिया है।
कलराज मिश्रा के अलावा बीजेपी सांसद साक्षी महाराज ने भी कहा है कि बिल आते, जाते रहते हैं। सरकार दोबारा फिर से कृषि कानून बना सकती है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (19 नवंबर) को राष्ट्र के नाम एक संबोधन में तीनों कृषि कानूनों की वापसी का ऐलान किया था। पिछले साल सितंबर में संसद ने विपक्ष के भारी हंगामे के बीच इन कानूनों का पारित किया था। उसके बाद से ही किसान आंदोलन कर रहे हैं और कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर किसान पिछले एक साल से आंदोलन कर रहे हैं।
गौरतलब है कि यूपी, उत्तराखंड सहित पांच राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में भाजपा सरकार ने इन तीनों कानूनों को वापस लेने में ही अपनी भलाई समझी। वहीं, माना जा रहा है कि यदि चुनावों में भाजपा को सफलता मिलती है तो इन तीनों कृषि कानूनों में कुछ सुधार कर दोबारा लाया जाएगा। बताया तो ये भी जा रहा है कि कई पूंजीपतियों ने लोगों ने फसल खरीदने के लिए बड़े बड़े गोदाम तक बना दिए थे। ऐसे में उन्हें इन कृषि कानूनों की वापसी पर भारी नुकसान हो सकता है। ऐसे में फिलहाल चुनाव का इंतजार किया जा रहा है।



