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April 21, 2026

स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय में डिजिटल एनाटॉमी टेबल का शुभारंभ

देहरादून के डोईवाला क्षेत्र में स्थित स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (एसआरएचयू) जॉलीग्रांट ने मेडिकल शिक्षा को नई दिशा देते हुए अपने स्किल्स एवं सिमुलेशन सेंटर में अत्याधुनिक डिजिटल एनाटॉमी टेबल स्थापित की है। इस अत्याधुनिक सुविधा का उद्घाटन विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. विजय धस्माना ने किया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. विजय धस्माना ने कहा कि यह डिजिटल एनाटॉमी टेबल शिक्षा के पारंपरिक तरीकों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि डिजिटल एनाटॉमी टेबल के उपयोग से मेडिकल शिक्षा में बड़ा बदलाव आएगा। उन्होंने बताया कि इस आधुनिक तकनीक से अब अध्ययन के लिए वास्तविक शव (कैडावर) पर निर्भरता कम होगी। इससे मेडिकल, नर्सिंग और पैरामेडिकल छात्र मानव शरीर की संरचना को थ्री डी स्वरूप में समझ सकेंगे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उन्होंने कहा कि एसआरएचयू आधुनिक तकनीक के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध है। विश्वविद्यालय का यह कदम न केवल छात्रों के सीखने के अनुभव को समृद्ध करेगा, बल्कि उन्हें एक कुशल और सक्षम स्वास्थ्य पेशेवर बनने की दिशा में भी सशक्त बनाएगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

 

प्रति कुलपति डॉ. ए.के. देवरारी ने कहा कि इस प्रकार की उन्नत तकनीक छात्रों को वैश्विक स्तर की मेडिकल शिक्षा प्रदान करने में सहायक सिद्ध होगी और उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करेगी। वहीं हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के डीन डॉ. ए. शरीफ ने कहा कि डिजिटल एनाटॉमी टेबल से मेडिकल छात्रों को मानव शरीर की संरचना को समझने में काफी सहायता मिलेगी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

डिजिटल एनाटॉमी टेबल के बारे में
डिजिटल एनाटॉमी टेबल एक आधुनिक शैक्षणिक उपकरण है, जो मानव शरीर की बनावट (एनाटॉमी) को समझने का एक आसान और प्रभावी तरीका प्रदान करता है। यह एक बड़ी टच-स्क्रीन टेबल होती है, जिसमें मानव शरीर के थ्री डी (त्रि-आयामी) मॉडल दिखाए जाते हैं। इसकी मदद से शरीर के अंगों को अलग-अलग परतों में देखकर समझा जा सकता है, जैसे हड्डियां, मांसपेशियां, नसें और आंतरिक अंग। छात्र किसी भी अंग को घुमा सकते हैं, बड़ा-छोटा कर सकते हैं और विस्तार से उसका अध्ययन कर सकते हैं।
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Bhanu Bangwal

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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।

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