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July 7, 2026

धामी सरकार ने विकास नहीं, विभाजन की राजनीति के बनाए नए रिकॉर्ड: गरिमा मेहरा दसौनी

उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से स्वयं को पांच वर्ष पूरे करने वाले मुख्यमंत्री के रूप में प्रस्तुत किए जाने पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि पिछले पांच वर्षों का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जाए तो यह कार्यकाल विकास और सुशासन के लिए नहीं, बल्कि विवादों, विफलताओं और जनहित के मुद्दों से लगातार पलायन के लिए याद किया जाएगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

गरिमा मेहरा दसौनी ने कहा कि मुख्यमंत्री अपनी उपलब्धियों का प्रचार कर रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि उनके कार्यकाल में प्रदेश बेरोजगारी, महंगाई, बिगड़ती कानून व्यवस्था, नशे के बढ़ते कारोबार, महिलाओं के खिलाफ अपराध और भ्रष्टाचार जैसे गंभीर मुद्दों से जूझता रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने जनता के मूल मुद्दों पर जवाब देने के बजाय समाज को बांटने वाली राजनीति को प्राथमिकता दी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री के पूरे कार्यकाल में विकास, रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा, पलायन, कृषि और सड़क जैसी बुनियादी समस्याओं पर ठोस उपलब्धियां दिखाई नहीं देतीं। इसके विपरीत राज्य की जनता को लगातार ऐसे मुद्दों में उलझाए रखा गया, जिनका आम नागरिक के दैनिक जीवन से कोई सीधा संबंध नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के भाषणों में बार-बार धार्मिक और सांप्रदायिक विषयों को प्रमुखता मिली, जबकि महंगाई, बेरोजगारी और कानून व्यवस्था जैसे ज्वलंत मुद्दों पर सरकार मौन रही। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

कांग्रेस नेत्री गरिमा मेहरा दसौनी ने आरोप लगाया कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में पीड़ित परिवार आज भी पूर्ण न्याय की प्रतीक्षा कर रहा है। भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल माफिया के मामलों ने युवाओं का भविष्य प्रभावित किया, जबकि भ्रष्टाचार के मामलों में भी सरकार की भूमिका सवालों के घेरे में रही। उन्होंने कहा कि जॉर्ज एवरेस्ट भूमि प्रकरण, केदारनाथ सोना चोरी प्रकरण और हाल में बद्रीनाथ धाम में दान से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामलों पर भी सरकार संतोषजनक जवाब देने में असफल रही है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पंचायत चुनावों के दौरान विपक्षी नेताओं के साथ दुर्व्यवहार, हिंसा और दबाव की घटनाएं सामने आईं तथा पत्रकारों के विरुद्ध कार्रवाई जैसे मामलों ने लोकतांत्रिक संस्थाओं और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार का मूल्यांकन प्रचार से नहीं, बल्कि जनता के जीवन में आए सकारात्मक बदलाव से होता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री अपने पांच वर्षों का वास्तविक रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखें, तो उन्हें यह बताना होगा कि रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग, कानून व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा के मोर्चे पर उनकी सरकार ने क्या ठोस उपलब्धियां हासिल की हैं। उत्तराखंड की जनता अब प्रचार और दावों से आगे बढ़ चुकी है तथा वह सरकार से जवाबदेही और वास्तविक विकास का हिसाब मांग रही है।
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