कम्युनिस्ट नेता कमरूद्दीन का निधन, राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर, झुकाया पार्टी का ध्वज
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता, किसान सभा के केन्द्रीय कार्यकारिणी सदस्य और जनता के जननेता कमरूद्दीन का शनिवार 18 जुलाई की दोपहर लगभग 1:30 बजे देहरादून स्थित आरोग्यधाम अस्पताल में निधन हो गया। शुक्रवार को अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें देहरादून जिले के सेलाकुई में स्थित अस्पताल में भर्ती कराया गया था। तत्पश्चात उन्हे देहरादून शहर के अस्पताल में लाया गया, लेकिन उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम साँस ली। सीपीएम के कार्यालय में उनके सम्मान में पार्टी का झंडा झुकाया गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
किसानों के संघर्ष से शीर्ष नेतृत्व तक का सफर
कमरूद्दीन ने अपना राजनीतिक जीवन किसानों के बीच काम करते हुए उनकी बुनियादी समस्याओं के लिए संघर्ष से शुरू किया। धीरे-धीरे वह पार्टी के करीब आए और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुँचे। उन्होंने सभावाला के प्रधान, जिला पंचायत सदस्य और विधानसभा चुनाव लड़ने के साथ-साथ वर्तमान में सभावाला से क्षेत्र पंचायत सदस्य के रूप में जनता की सेवा की। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
भूमाफियाओं के खिलाफ निडर संघर्ष
सीपीएम के जिला सचिव अनंत आकाश ने बताया कि कमरूद्दीन ने जनता की बुनियादी समस्याओं को लेकर अनवरत संघर्ष किए। पुलिस दमन का शिकार होते हुए भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और कई बार जेल भी गए। भूमाफियाओं के खिलाफ उनका मुखर और निडर रुख हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने गरीबों को उनका हक दिलाने में अहम योगदान दिया और अपनी सादगी व जुझारूपन की मिसाल कायम की। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
पार्टी नेताओं, किसानों ने दी श्रद्धांजलि
उनके निधन पर सीपीआई एम पोलित ब्यूरो सदस्य एवं किसान सभा के केन्द्रीय महामंत्री बीजू कृष्णन, केन्द्रीय कमेटी सदस्य राजेंद्र नेगी, पार्टी राज्य सचिव मंडल सदस्य इन्दु नौडियाल, भूपाल सिंह रावत, लेखराज, शिव प्रसाद देवली, अनन्त आकाश, माला गुरूंग, सुधा देवली,हिमांशु चौहान, मनमोहन सिंह, दमयन्ती नेगी, पुरूषोतम बडोनी, दलजीत सिंह भगवन्त पयाल, अभिषेक भण्डारी, अय्याज खान, रविंद्र नौडियाल ने गहरा शोक व्यक्त किया है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कमरूद्दीन की यादों को हमेशा अपने दिलों में संजोए रखने की बात कही। उन्होंने कामरेड कमरूद्दीन का जाना न केवल कम्युनिस्ट पार्टी के लिए, बल्कि समूचे किसान आंदोलन और गरीब-मजलूमों के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनकी याद हमेशा जन-जन के मन में जीवित रहेगी।
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