ललित मोहन गहतोड़ी की कलम से कुमाऊंनी में हास्य होली गीत- झगड़ों भौत खराब…

अच्हारे शराबि पी शराब फोड़फाड़ि ना कर।।टेक।।
झगड़ों भौत खराब… शराबि पी शराब…
बकबक करलै बात बढ़ि जालि।।२।।
बतड़गैं ठाड़ होलो… शराबि पी शराब…
झगड़ों झनकरै देखिजानि लेलै।।२।।
मिलजुलि सब धुसिजाला… शराबि पी शराब…
हाटा भाटा टुटला तेरो मुख फुटलो।।२।।
घुड़चाक्की रड़ि जालि… शराबि पी शराब…
दारू दवाई को खर्चो लागलो।।२।।
खुमारि खूब सतालि… शराबि पी शराब…
हास्पिटल में खाट सेटाला।।२।।
उप्या खूप बुकाला… शराबि पी शराब…
कसियां उठलै बैठि कसि रौलै।।२।।
पेटकोवा पड़ि जाला… शराबि पी शराब…
छोड़ि दे शराब पिनु भल केई नाई हुनू।।२।।
नानतिना मुखकै च्याला… शराबि पी शराब…
कवि का परिचय
नाम-ललित मोहन गहतोड़ी
शिक्षा :
हाईस्कूल, 1993
इंटरमीडिएट, 1996
स्नातक, 1999
डिप्लोमा इन स्टेनोग्राफी, 2000
निवासी-जगदंबा कालोनी, चांदमारी लोहाघाट
जिला चंपावत, उत्तराखंड।




सुंदर रचना?????