मुफ्त की रेवड़ियों और वर्तमान राजनीति पर कटाक्ष कर गया बच्चों का नाटक- अजब गजब पाठशाला
भारतेंदु हरिश्चंद्र के लिखित नाटक अंधेर नगरी का रूपांतरण अजब गजब पाठशाला का बच्चों ने जब मंचन किया तो सभी दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। इस नाटक का रूपांतरण और निर्देशन जानी मानी कलाकार निवेदिता बौंठियाल ने किया। नाटक ने वर्तमान राजनीति पर करारा प्रहार किया। साथ ही मुफ्त की रेवड़ियों पर भी कटाक्ष किया। इससे पहले नाटक का उद्घाटन उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। नाटक का मंचन देहरादून के सर्वे चौक स्थित आईआरडीटी प्रेक्षागृह में किया गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
रंगायन एसोसिएशन की ओर से प्रस्तुत नाटक की लेखिका व निर्देशक निवेदिता ने भारतेंदु हरिश्चंद्र द्वारा लिखित नाटक अंधेर नगरी को आज के परिपेक्ष में रूपांतरित किया। नाटक को नाम- अजब गजब पाठशाला दिया गया। इस नाटक में बहुत ही बेहतरीन तरीके से पाठशाला में गुरु व विद्यार्थियों के बीच संवाद को प्रस्तुत किया गया। साथ ही ये संदेश दिया गया कि लालच बुरी बला है। देश का वह राजा कभी जनता का भला और जनता के साथ न्याय नहीं कर सकता, जो अपनी झूठी शान और सत्ता के लिए लोगों को प्रलोभन दे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
नाटक में राजा की भूमिका में विकास रावत ने बेहतरीन अभिनय किया। इसके अलावा अन्य कलाकारों में नवनीत गैरोला, सुषमा बड़थ्वाल, धनंजय कुकरेती, अमित बहुखंडी, आरव मल्होत्रा, कुणाल पंवार, आर्यन बड़थ्वाल, शिवांश जोशी, उदयवीर गेरा, आयुष, जगमीत, प्रत्युष, शुभम, रुचि, शिवानी, राहुल, ऋषभ, कर्मण्य, वैष्णवी, शिवांश, विधि, देवांश, सानिध्य, रिया, अदिति, नूतन ने भी जानदार अभिनय किया। प्रकाश परिकल्पना टीके अग्रवाल, संगीत निर्देशन विकास रावत, गायन व नृत्य निर्देशन प्रिया उनियाल. संगीत परिचालन हितेश राणा, मंच व्यवस्थापक अमित सेमवाल और निर्मला जखमोला रहे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
सैटेलाइट युग ने छीन लिया बच्चों का बचपनः सूर्यकान्त धस्मानाइससे पहले नाटक का उद्घाटन करते हुए उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि आज सैटलाइट युग में कंप्यूटर और मोबाइल पर उपलब्ध ऑनलाइन साइट्स ऑनलाइन गेम्स, इंस्ट्रा, फेस बुक व अन्य सोशल साइट्स ने हमारे बच्चों का बचपन छीन लिया है। बच्चे व युवा पीढ़ी व्यक्तित्व के विकास के लिए आवश्यक सारी गतिविधियों से दूर हो गए हैं। उनका स्थान कर कंप्यूटर और मोबाइल के स्क्रीन ने ले लिया है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा कि जीवन में सर्वांगीण विकास के लिए खेल कूद, रंग मंच, सांस्कृतिक, मेल जोल की गतिविधियां जरूरी हैं। ऐसे में निवेदिता बौठियाल का बच्चों का नाटक अजब गजब पाठशाला का सफल मंचन एक बेहतरीन प्रयास है। ऐसा प्रयास बच्चों को उनके बचपन को जीने का अवसर देता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा कि आज के युग में मोबाइल फोन ने एक काल्पनिक दुनिया सोशल समुदाय खड़ा कर दिया। इसने समाज के वास्तविक रिश्तों को इतनी बुरी तरह प्रभावित किया है कि एक ही कमरे में बैठे माता पिता व बच्चे एक दूसरे से बातचीत करने की बजाय अपने अपने मोबाइल में व्यस्त रहते हैं। ऐसे में बच्चों को एक कलाकार के रूप में तैयार कर उनको रंग मंच पर लाना और उनके द्वारा बेहतरीन कला का प्रदर्शन करना अपने आप में सराहनीय कार्य है। इसे अजब गजब पाठशाला की लेखिका व निर्देशिका निवेदिता ने किया है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
धस्माना ने कहा कि आज देश में जिस तरह की राजनीति का चलन चल पड़ा है, इस पर यह नाटक एक कड़ा प्रहार है। देश के नेता जनता को छोटे छोटे प्रलोभन और लालच दे कर सत्ता पर काबिज हो जाते हैं और देश के वास्तविक मुद्दों के समाधान के लिए कुछ नहीं करते। इससे देश व समाज का नुकसान होता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा कि समाज व नागरिकों में मुफ्त की रेवड़ियों के वास्तविक नुकसान के बारे में जागरूकता फैलाने वाला संदेश अजब गजब पाठशाला ने दिया है। इसके लिए आयोजन से जुड़ी पूरी टीम और सभी कलाकार बधाई के पात्र है। लगभग डेढ़ घंटे के नाटक ने दर्शकों को ऐसा बांधा कि पता ही नहीं चला कि नाटक अपने चरमोत्कर्ष पर पहुंच गया।
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