ऑख्यूं अगनै माना न माना, जीवन बि एक भरम च. कैसे नि मललव, बस ! ऑख्यूं शरम च.. ऐसक्रीम समान...
साहित्य जगत
प्रकृति प्रेमी कुंवर बर्तवाल मैं आज सभी के, करुण स्वर सुन चुका। पर मेरी वेदना, कोई गा न सका।। ये...
दग्णु एक भलु दग्णु, मन्खि थैं कख-पौंछै दींद. एक बुरु दग्णु, मन्खि थैं कख- गिरै दींद.. जमीन से जुड़िक-खूब पढिक,अग्नै...
पेट कूणा-कचरा डब्बा नी-यो, यो- त्यारू पेट च. भ्वरद जांणी ये-जो, पेट च-कि इंडियागेट च.. खांणु-खांणा-तीन बग्ता नीम, पुरण्यूंल बड़ै,...
वो दिन वो भूखा- नांगा दिन, अज्यूंबि याद छन. वो रूखा टिक्कड़ बि, हमकु खैराद छन.. भलु स्वाद छौ, जौ-...
नई उमंग व नई तरंग लेकर 15 अगस्त की सुबह आई। लगातार कुछ दिन से दून में बारिश हो रही...
आजादी बड़ि कुर्बन्यूं से मिलीं आजादी, भलिके सम्माऴ देश रक्षा कि खातिर, द्वी कदम चलिके सम्माऴ तिल-मिल नि द्योखु वो...
खोखली नींव लगता था आज सारे जहाँ की, खुशी बेशुमार हो गयी। नहीं दी परीक्षा अपने लिए, फिर भी खुशियों...
गढ़ रत्न नरेंद्र सिंह नेगी हे वसुंधरा के महान सपूत, तेरे गीत हृदय गुंजन करें। कंठ में मिठास शहद की...
गीत आपके यों ही गूंजें।। जन्मदिवस की शुभकामना, मेरी भी श्री नेगी जी को। निपट डालडे के बीच सुशोभित, शुद्ध...
