अशोक आनन का गीत-मनभावन सावन है
मनभावन सावन है।
मौसम भी पावन है।
मैली धरती का भी
अब उजला दामन है।
कृष्ण – भक्ति में डूबा
मन का वृंदावन है।
सप्त पुरी , द्वादश लिंग
शक्ति पीठ वावन है।
तुलसी बिरवा सज्जित
अब घर का आंगन है।
दु:ख की उखड़ी – उखड़ी
अब लीपन – छाबन है।
घर का कोना – कोना
महकाता माखन है।
पेट के घर भूख़ का
कहां अब शासन है।
मेघों के लिए धूप
आवारा डायन है।
कवि का परिचय
अशोक ‘आनन’, जूना बाज़ार, मक्सी जिला शाजापुर मध्य प्रदेश।
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