सरकारी कर्मचारियों की उम्मीदों पर फिर से झटका, पुरानी पेंशन योजना बहाली पर सरकार ने दिया ये बयान
एक बार फिर से केंद्रीय कर्मचारियों की उम्मीदों पर झटका लगा है। एक और जहां विपक्षी दल इसे चुनावी मुद्दा बना रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ केंद्र की बीजेपी सरकार को ये मुद्दा नहीं लगता है। एक बार फिर से केंद्र सरकार ने सोमवार को लोकसभा में पुरानी पेंशन बहाली पर अपना रुख साफ कर दिया है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने ओल्ड पेंशन स्कीम की बहाली को लेकर कहा कि सरकार के पास ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
ओल्ड पेंशन स्कीम की मांग पकड़ रही है जोर
ओल्ड पेंशन स्कीम को फिर से बहाल करने की मांग जोर पकड़ चुकी है। पिछले दिनों दिल्ली के रामलीला मैदान में देशभर से आए सरकारी कर्मचारियों ने सरकार पर दबाव बढ़ाने के लिए धरना प्रदर्शन भी किया है। सोमवार 11 दिसंबर, 2023 को संसद में भी ओल्ड पेंशन स्कीम की बहाली को लेकर केंद्र सरकार से सवाल पूछा गया। तब सरकार ने बताया कि उसे कई दफा ओल्ड पेंशन स्कीम को फिर से बहाल करने को लेकर अनुरोध पत्र मिलता रहा है। साथ ही सरकार ने साफ कर दिया कि एक जनवरी 2004 या उसके बाद नियुक्त किए गए केंद्रीय कर्मचारियों के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम को फिर से बहाल करने का भारत सरकार के सामने कोई प्रस्ताव नहीं है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
ओपीएस बहाल की योजना नहीं
प्रश्नकाल में वित्त मंत्री से लोकसभा सांसद ए गणेशमूर्ति और ए राजा ने सवाल किया कि क्या सरकारी कर्मचारियों के एसोसिएशन ने योगदान वाले पेंशन स्कीम की जगह आखिरी वेतन के आधार पर दिये जाने वाले ओल्ड पेंशन स्कीम को फिर से बहाल करने की मांग की है और इन मांगों पर सरकार का क्या रुख है? इस प्रश्न पर लिखित जवाब में वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने कहा, एक जनवरी 2004 को या उसके बाद नियुक्त किए गए कर्मचारियों के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम को फिर से बहाल करने का भारत सरकार के सामने कोई प्रस्ताव नहीं है। केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए लागू नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) से जुड़े मुद्दे को देखने के लिए तथा किसी आवश्यक परिवर्तन के लिए वित्त सचिव की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
बताई पेंशनभोगियों की संख्या
चौधरी ने लोकसभा को बताया कि देश में 11,41,985 सिविल पेंशनभोगी, 33,87,173 रक्षा पेंशनभोगी (सिविल पेंशनभोगी सहित रक्षा पेंशनभोगी), 4,38,758 दूर संचार पेंशनभोगी, 15,25,768 रेलवे पेंशनभोगी और 3,01,765 डाक पेंशनभोगी हैं। इसे मिलाकर देश में कुल 67,95,449 पेंशनभोगी हैं। चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार के पेंशनभोगियों को लेकर कोई डेटाबेस नहीं रखती है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इन राज्यों में लागू हो चुका है OPS
सरकार ने लोकसभा में बताया कि राजस्थन, छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश की राज्य सरकारों ने ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) को लागू कर दिया है। इसे लेकर इन राज्य सरकारों ने केंद्र सरकार, पेंशन निधि नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) को अपने निर्णय के बारे में बता दिया है। इन राज्य सरकारों ने अंशदान की वापसी/निकासी और उस पर प्रापत लाभ के लिए अनुरोध किया है। हालांकि, पंजाब सरकार ने भारत सरकार को सूचित भी किया है कि यह NPS में कर्मचारी और सरकारी अंशदान का भुगतान जारी रखेगी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
पुरानी पेंशन योजना
नई और पुरानी, दोनों पेंशन के कुछ फायदे और नुकसान हैं। पुरानी पेंशन योजना में रिटायरमेंट के समय कर्मचारी के अंतिम वेतन की आधी राशि पेंशन के रूप में दी जाती है। पुरानी स्कीम में पेंशन कर्मचारी की आखिरी बेसिक सैलरी और महंगाई के आंकड़ों से तय की जाती है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
पुरानी पेंशन स्कीम में कर्मचारियों के वेतन से पैसा नहीं काटा जाता। पुरानी पेंशन योजना में कर्मचारी को दी जाने वाली पेंशन का भुगतान सरकार की ट्रेजरी के माध्यम से होता है। इसके अतिरिक्त इस पेंशन स्कीम में 20 लाख रुपये तक ग्रेच्युटी की रकम मिलती है। रिटायर्ड कर्मचारी की मृत्यु होने पर पेंशन का पैसा उसके परिजनों को मिलने लगता है। पुरानी पेंशन स्कीम में हर 6 महीने बाद कर्मचारियों को DA डीए दिए जाने का प्रावधान है। इसके अलावा जब-जब सरकार वेतन आयोग का गठन करती है, पेंशन भी रिवाइज हो जाती है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
नई पेंशन स्कीम में क्या है खास
NPS में कर्मचारियों की सैलरी से 10% की कटौती की जाती है, जबकि पुरानी पेंशन योजना में सैलरी से कोई कटौती नहीं होती थी। एक तरफ जहां पुरानी पेंशन योजना में GPF की सुविधा होती थी, वहीं नई स्कीम में इसकी सुविधा नहीं है। पुरानी पेंशन स्कीम में रिटायर होने के समय सैलरी की आधी राशि पेंशन के रूप में मिलती थी, जबकि नई पेंशन योजना में आपको कितनी पेंशन मिलेगी, इसकी कोई गारंटी नहीं है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
दोनों में सबसे बड़ा अंतर यह है कि पुरानी पेंशन योजना एक सुरक्षित योजना है, जिसका भुगतान सरकारी खजाने से किया जाता है। नई पेंशन योजना शेयर बाजार पर आधारित है, जिसमें आपके द्वारा एनपीएस में लगाए गए पैसे को शेयर बाजार में लगाया जाता है। अब खुद ही समझ जाएं कि चंद पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए इस योजना को लागू किया गया। वहीं, पुरानी पेंशन योजना में ऐसा कोई प्रावधान नहीं था। अगर बाजार में मंदी रही तो एनपीस पर मिलने वाला रिटर्न कम भी हो सकता है।
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