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February 24, 2026

कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन के एक साल पूरे, पढ़िए अब तक के आंदोलन और आगामी कार्यक्रम की जानकारी

भारत में तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन को आज एक साल पूरा हो गया है। पिछले साल 'दिल्ली चलो' के आह्वान के साथ किसान आंदोलन शुरू हुआ था।

भारत में तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन को आज एक साल पूरा हो गया है। पिछले साल ‘दिल्ली चलो’ के आह्वान के साथ किसान आंदोलन शुरू हुआ था। पिछले साल 26 नवंबर को ही किसानों ने दिल्ली बॉर्डर में दाखिल होने की कोशिश की थी और पुलिस ने उन्हें रोका था। तभी से किसान दिल्ली बॉर्डर पर डटे हुए हैं। किसान आंदोलन का साल भर पूरा के मौके पर एक बार फिर किसान दिल्ली बॉर्डर पर जमा हो गए हैं। किसान संगठन कृषि कानूनों को वापस लेने के बाद भी आंदोलन खत्म करने को तैयार नहीं है। इस आंदोलन के दौरान सात सौ से अधिक किसानों की जान भी चला गई। आज के दिन किसान संगठन पूरे देश भर के जिला मुख्यालयों के समक्ष प्रदर्शन भी करेंगे।
एक साल पहले शुरू हुआ किसानों का आंदोलन अब भी जारी है। पीएम नरेंद्र मोदी खुद कृषि कानूनों को रद्द करने का ऐलान कर चुके हैं। बावजूद इसके किसान MSP पर गारंटी की मांग कर रहे हैं। कृषि कानूनों के रद्द होने की घोषणा के बाद भी किसानों का आंदोलन अभी भी जारी है। किसान 29 नवंबर को संसद की तरफ ट्रैक्टर रैली निकालने वाले हैं। इसे देखते हुए दिल्‍ली के गाजीपुर बार्डर (Ghazipur Border) पर सुरक्षा व्‍यवस्‍था को बढ़ा दिया गया है। प्रशासन की ओर से शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
किसान 29 नवंबर को संसद तक ट्रैक्टर मार्च की तैयारियों में जुटे हैं. इसके लिए अमृतसर से किसान दिल्ली के लिए रवाना हो रहे हैं. इसे देखते हुए दिल्‍ली में भी प्रशासन की ओर से काफी इंतजाम किए जा रहे हैं तो किसान भी पूरी तैयारी के साथ आ रहे हैं। इस दौरान किसानों ने ठंड से बचने के लिए भी पुख्‍ता इंतजाम किए हैं। किसानों ने ठंड से बचाव के लिए अपनी ट्रॉली को बाहर से ढक दिया है, वहीं ट्रॉली के अंदर पराली बिछा ली है, जिससे ठंड से बचा जा सके। उधर, किसानों के नेता राकेश टिकैत ने साफ कर दिया है कि सरकार की ओर से एमएसपी गारंटी कानून सहित किसानों की अन्‍य मांगों को नहीं माना जाता है तब तक विरोध जारी रहेगा।
किसान आंदोलन की 10 अहम तारीखें
26 नवंबर 2020- दिल्ली के बॉर्डर पर आंदोलन शुरू
8 दिसंबर 2020- किसानों का भारत बंद
12 जनवरी- कानून के अमल पर सुप्रीम कोर्ट की रोक
20 जनवरी- कानून सस्पेंड करने का सरकारी प्रस्ताव
22 जनवरी- सरकार से आखिरी बातचीत
26 जनवरी- किसानों की ट्रैक्टर रैली में हिंसा
3 अक्टूबर- लखीमपुर खीरी में हिंसा
15 अक्टूबर- सिंघु बॉर्डर पर बर्बर हत्या
21 अक्टूबर- रास्ता बंद करने पर सुप्रीम कोर्ट की फटकार
19 नवंबर- कृषि कानून वापस लेने का एलान
किसान आंदोलन पर कब-कब लगा दाग
26 जनवरी- ट्रैक्टर रैली के दौरान दिल्ली में हिंसा
अप्रैल- टीकरी बॉर्डर पर बंगाल की युवती से रेप
16 जून- बहादुरगढ़ में एक व्यक्ति को जिंदा जलाया
15 अक्टूबर- सिंघु बॉर्डर पर बर्बर हत्या
आंदोलन की रणनीती
26 नवंबर- किसानों का दिल्ली कूच, दिल्ली के बॉर्डर पर प्रदर्शन
28 नवंबर- मुंबई में संयुक्त किसान मोर्चा की रैली
29 नवंबर- संसद तक किसानों का ट्रैक्टर मार्च, 60 ट्रैक्टर पर 1000 किसानों का कूच
इन मुद्दों पर है तकरार
MSP को कानूनी अधिकार मिले
बिजली बिल का ड्राफ्ट वापस हो
प्रदूषण के लिए किसानों को सजा न मिले
किसानों से मुकदमा वापस हो
अजय मिश्रा को बर्खास्त किया जाए
शहीद किसानों को मुआवजा मिले
कृषि कानूनों का कैलेंडर
5 जून 2020- अध्यादेश लाया गया
17 सितंबर 2020- कृषि बिल लोकसभा से पास
20 सितंबर 2020- कृषि बिल राज्यसभा से पास
27 सितंबर 2020- राष्ट्रपति ने कृषि कानूनों को मंजूरी दी
26 नवंबर 2020- दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलन शुरू
19 नवंबर 2021- कृषि कानून वापसी का एलान
24 नवंबर 2021- कानून वापसी को कैबिनेट की मंजूरी
ऐसे वापस होंगे कृषि कानून
कैबिनेट ने कानून वापसी के बिल को मंजूरी दी
अब संसद के दोनों सदनों में बिल पेश होगा
संसद के दोनों सदनों से बिल पास कराना जरूरी
बिल पर राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद तीनों कानून वापस
कृषि कानून संसद से पास, इसलिए संसद से ही वापसी

Bhanu Bangwal

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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।

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