Loksaakshya Social

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

July 30, 2026

पीड़ितों से ही वाहन और भोजन की पुलिस कर रही मांग, डीजीपी हुए सख्त, कहा-कार्रवाई भुगतने को रहें तैयार

अपराधियों की गिरफ्तारी, गुमशुदा व्यक्ति की बरामदगी आदि के लिए जिलों से बाहर या दूसरे राज्यों में जाने के लिए पुलिस की ओर से पीड़ित परिवार की ओर से ही वाहन, तेल और भोजन की मांग की जा रही है।

अपराधियों की गिरफ्तारी, गुमशुदा व्यक्ति की बरामदगी आदि के लिए जिलों से बाहर या दूसरे राज्यों में जाने के लिए पुलिस की ओर से पीड़ित परिवार की ओर से ही वाहन, तेल और भोजन की मांग की जा रही है। ऐसे प्रकरण सामने आने पर उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार गंभीर हुए हैं। उन्होंने पुलिस कर्मियों को सख्त निर्देश दिए कि यदि किसी की ऐसी शिकायत मिलती है तो वो कार्रवाई भुगतने को तैयार रहे।
उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी की गई सूचना के मुताबिक किसी भी अभियोग में अभियुक्त की गिरफ्तारी, गुमशुदा की बरामदगी के लिए पुलिस टीम को गैर जनपद अथवा अन्य राज्यों में दबिश या तलाश के लिए वाहन की आवश्यकता पड़ती है। कई बार देखने में आया है कि पुलिस की ओर से ही पीड़ित परिवार से ही वाहन की व्यवस्था कराने के लिए कहा जा रहा है। या फिर वाहन में तेल डलवाने, टीम के रहने और खाने की व्यवस्था के संबंध में कहा जा रहा है।
स्पष्ट किया गया है कि इस प्रकार के विभिन्न कार्यों के लिए प्रत्येक थाने में थाना विविध निधि के अन्तर्गत पर्याप्त धनराशि उपलब्ध करायी जाती है। इसके बावजूद भी इस प्रकार की शिकायतें प्रकाश में आ रही है, जो कि घोर निंदनीय व आपत्तिजनक है और किसी भी दशा में स्वीकार्य नहीं है। डीजीपी अशोक कुमार ने सख्त निर्देश के साथ चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में विवेचक स्वार्थवश या कर्तव्य से विमुख होकर उपरोक्त कृत्य करता है तो उसकी जवाबदेही तय करते हुए संबंधित के खिलाफ कठोर कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। इस संबंध में उन्होंने सभी जनपद प्रभारियों को संवेदनशील रहने को कहा है।
पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने कहा कि किसी घटना या अपराध के घटित होने पर पीड़ित अथवा आमजनमानस की पुलिस के प्रति यह अपेक्षा होती है कि पुलिस जनता के साथ मधुर व्यवहार करे। साथ ही उसकी समस्या अथवा उसके साथ घटित घटना पर न्यायोचित तरीके से विधिक कार्यवाही अमल में लाए और उसे न्याय मिल सके। यदि हम हर निर्णय पीड़ित को केंद्र में रखकर लें, तो निःसंदेह हमारी पुलिस व्यवस्था अच्छी बनेगी और पीड़ित का पुलिस पर विश्वास बना रहेगा। समय-समय पर पुलिस मुख्यालय से इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी होते रहते हैं, इसके बावजूद भी कतिपय मामलों में ऐसी शिकायतें प्रकाश में आ रही हैं। जो अत्यन्त आपत्तिजनक और बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है। जो भी पुलिसकर्मी ड्यूटी में ढिलाई बरतेगा, उसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।