प्रदर्शनकारियों ने रोका राहुल गांधी का काफिला, संसद में उनकी मांग उठाने का मिला आश्वासन, फिर बैकफुट पर आई सरकार
17 जुलाई को कांग्रेस नेता एवं राहुल गांधी उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में युवाओं और छात्रों से पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था की खामियों को लेकर संवाद करने आए थे। छात्रों की गूंज नाम से आयोजित कार्यक्रम को देहरादून के परेड मैदान में पहले अनुमति दे दी गई थी। मैदान की फीस जमा करने के बाद फिर इस अनुमति को निरस्त कर दिया गया और ये कार्यक्रम रेसकोर्स स्थित बन्नू स्कूल के मैदान में आयोजित किया गया। वहीं, परेड मैदान में एक गायिका का कार्यक्रम बीजेपी या सरकार की ओर से आयोजित किया गया। इसमें युवाओं की एंट्री फ्री कर दी गई। इसके बावजूद छात्रों की गूंज के कार्यक्रम में काफी भीड़ पहुंच गई। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
यही नहीं, कांग्रेस का तो यहां तक आरोप है कि राहुल गांधी को जौलीग्रांट एयरपोर्ट से देहरादून तक पहुंचने में देरी कराने के लिए भी जाल बिछाया गया। ऐसे में हरिद्वार रोड पर हर्रावाला में पुनर्विकसित रेलवे स्टेशन को जनता को समर्पित करने का कार्यक्रम, बीजेपी नेता के यूथ फाउंडेशन का कार्यक्रम कुआंवाला में रखा गया। ताकि राहुल गांधी जाम में फंस जाएं। देहरादून पहुंचने पर राहुल को देहरादून मसूरी रोड स्थित एक होटल में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक करनी थी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इसके बाद ही शाम को छात्रों की गूंज कार्यक्रम था। रास्ते में परेड मैदान पड़ना था और यहां छठे लोक संवर्धन पर्व का आयोजन था। इस पर्व में 17 जुलाई को गायिका जैस्मीन सैंडलास के कार्यक्रम की अचानक घोषणा की गई और फ्री एंट्री कर दी गई। ताकि राजपुर रोड सहित शहर की सड़कों में यातायात जाम की स्थिति बनी रहे। इतने जाल के बावजूद चूक एक हो गई कि राहुल गांधी तय समय से काफी पहले ही देहरादून पहुंच गए और वह जाम से बच गए। परेड मैदान में कार्यक्रम बीजेपी की ओर से प्रायोजित था और बन्नू स्कूल में कांग्रेस की ओर से। दोनों की सफलता और एक दूसरे की विफलता को लेकर दोनों पक्षों की ओर से तर्क दिए जा रहे हैं। ये फैसला हम जनता पर छोड़ते हैं और असल खबर पर आते हैं, जिसे लेकर हमने हैडिंग बनाई है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
राहुल का रोका काफिला
मीडिया में प्रकाशित खबरों में कहा गया है कि उत्तराखंड के देहरादून-ऋषिकेश हाईवे पर ‘सात मोड़’ के पास पर्यावरण प्रेमियों ने सड़क चौड़ीकरण के लिए काटे जा रहे हजारों पेड़ों को बचाने की मांग को लेकर राहुल गांधी का काफिला रोका। राहुल ने उनकी व्यथा सुनी और संसद में मुद्दा उठाने का आश्वासन दिया। इसके बाद राज्य सरकार ने फिलहाल पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
आंदोलनकारियों की अपील
घटनाक्रम ये है कि भानियावाला-ऋषिकेश सड़क चौड़ीकरण प्रोजेक्ट के तहत करीब 3,000 से 4,000 पेड़ काटे जाने प्रस्तावित थे। इसके विरोध में स्थानीय लोग और पर्यावरण प्रेमी 11 दिनों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। देहरादून में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में शामिल होकर जौलीग्रांट एयरपोर्ट लौटते समय प्रदर्शनकारियों ने राहुल गांधी का काफिला रोक लिया। लोगों ने आरोप लगाया कि प्रशासन आंदोलनकारियों पर दबाव बना रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि क्षेत्र में पेड़ों की कटाई से पर्यावरण और स्थानीय जनजीवन पर गंभीर असर पड़ेगा। उन्होंने राहुल गांधी से इस मामले में हस्तक्षेप करने और उनकी आवाज़ संबंधित अधिकारियों तक पहुँचाने की अपील की। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
संसद में उठाने का आश्वासन
खबरों के मुताबिक, राहुल गांधी ने उनकी बात धैर्यपूर्वक सुनी और कहा कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन जरूरी है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से एक लिखित नोट मांगा और इसे संसद सत्र में प्रमुखता से उठाने का पूरा भरोसा दिलाया। इस दौरान मौके पर मौजूद कई लोग राहुल गांधी को देखकर भावुक हो गए और उन्होंने अपनी मांगों को लेकर विस्तार से बातचीत की। घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
पेड़ों के कटान पर रोक
राहुल गांधी के इस आश्वासन और बढ़ते जनदबाव के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मौके पर पेड़ों के कटान को तत्काल प्रभाव से रोक दिया है। साथ ही मुख्यमंत्री ने सभी हितधारकों (पर्यावरणविदों और स्थानीय नागरिकों) से बातचीत कर कोई समाधान निकालने के निर्देश दिए हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
मीडिया की खबरों में कहा गया कि मुख्यमंत्री ने कहा कि जब तक सभी पक्षों के साथ संतोषजनक सहमति और विश्वास का वातावरण नहीं बन जाता, तब तक पेड़ों की कटाई नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से स्थानीय नागरिकों, पर्यावरण प्रेमियों और विभिन्न संगठनों की ओर से परियोजना को लेकर जो सुझाव और चिंताएं सामने आई हैं, उनका प्रदेश सरकार ने गंभीरता से संज्ञान लिया है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने प्रमुख सचिव और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों के साथ दोबारा विस्तृत संवाद स्थापित किया जाए, ताकि सभी पक्षों की बात सुनकर आगे की कार्रवाई की जा सके। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि देहरादून-ऋषिकेश फोर-सिक्स लेन परियोजना भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) की महत्वपूर्ण परियोजना है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इस पर उच्च न्यायालय के निर्देशों तथा सभी आवश्यक वैधानिक और पर्यावरणीय स्वीकृतियों के अनुरूप कार्यवाही की जा रही थी। परियोजना में वन्यजीव संरक्षण के विशेष प्रविधान भी किए गए हैं। इसके तहत लगभग 3.5 किलोमीटर लंबा हाथी अंडरपास बनाया जाना प्रस्तावित है। इसके अलावा छोटे वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन के लिए विशेष कल्वर्ट बनाए जाएंगे। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष और सड़क दुर्घटनाओं में वन्यजीवों की मौत की घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विकास की पक्षधर है, लेकिन जनभावनाओं, पर्यावरण और स्थानीय हितों की अनदेखी कर कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार उच्च न्यायालय के निर्देशों का पूरा सम्मान करते हुए आगे की कार्रवाई करेगी, लेकिन संवाद और सहमति के आधार पर ही निर्णय लिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार के लिए प्रकृति, जनभावनाएं और प्रदेश का विकास तीनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। इन्हीं के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ना सरकार की प्राथमिकता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
ये है भानियावाला-जालीग्रांट-ऋषिकेश चार-छह लेन परियोजना
इस परियोजना में 20 किलोमीटर लंबा चार-छह लेन मार्ग बनेगा। करीब 743 करोड़ की लागत से विकसित होने वाले इस मार्ग के निर्माण से देहरादून, जालीग्रांट एयरपोर्ट और ऋषिकेश के बीच सुगम संपर्क उपलब्ध होगा। वन क्षेत्र में राइट आफ वे 60 मीटर से घटाकर 23 मीटर किया गया है। वहीं 754 पेड़ों के प्रत्यारोपण की भी योजना बनाई गई है। तर्क दिया जा रहा है कि इससे यातायात जाम और दुर्घटनाएं कम होंगी, चारधाम यात्रा व पर्यटन को गति मिलेगी तथा वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही भी सुनिश्चित होगी। वहीं, पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि ये सड़क पर्याप्त चौड़ी है। इसमें जाम भी नहीं लगता है। ऐसे में पेड़ों की बलि क्यों दी जा रही है।
नोटः सच का साथ देने में हमारा साथी बनिए। यदि आप लोकसाक्ष्य की खबरों को नियमित रूप से पढ़ना चाहते हैं तो नीचे दिए गए आप्शन से हमारे फेसबुक पेज या व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ सकते हैं, बस आपको एक क्लिक करना है। यदि खबर अच्छी लगे तो आप फेसबुक या व्हाट्सएप में शेयर भी कर सकते हो। यदि आप अपनी पसंद की खबर शेयर करोगे तो ज्यादा लोगों तक पहुंचेगी। बस इतना ख्याल रखिए।



