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November 8, 2026

युवा कवि एवं बीएचयू के छात्र गोलेन्द्र पटेल की दो कविताएं-माँ को मूर्खता का पाठ पढ़ता बचपन और ठेले पर ठोकरें

युवा कवि एवं बीएचयू के छात्र गोलेन्द्र पटेल की दो कविताएं-माँ को मूर्खता का पाठ पढ़ता बचपन और ठेले पर ठोकरें।

माँ को मूर्खता का पाठ पढ़ता बचपन

जन मूर्ख-दिवस पर रो रहा है मेरा मन
माँ को मूर्खता का पाठ पढ़ता बचपन
लौट रहा है स्मृतियों की गठरी लेकर
हृदय के किसी कोने में विश्राम के लिए

लंगोटिया यारों के संग
गुल्ली-डंडा होला-पाती बुल्ली-क-बुल्ला
तरह-तरह के खुरपाती खेलों का खुल्लम-खुल्ला
तड़क-भड़क ताजी तरंग
गाजर-गुजरिया लुका-छिपी डाकू-पुलिस
गोली-सोली टीवी-उवी खो-खो सो-खो किस-

किस को याद करूँ सब में सामिल है
एक ही बहाना – झूठ
माई मैदान जात हई
जैसे हम माँ को मूर्ख बनाते थे बचपन में
आज कोई हमें बना रहा है
हम क्या करें
माँ बन जायें
या फिर पिता की तरह उसे समझायें
ना समझे तो कान भी ऐंठें
और घुड़कें-सुड़कें!

कविता-2

ठेले पर ठोकरें

तीसी चना सरसों रहर आदि काटते वक्त
उनके डंठल के ठूँठ चुभ जाते हैं पाँव में

फसलें जब जाती हैं मंडी
तब अनगिनत असहनीय ठोकरें लगती हैं
एक किसान को – उसकी उम्मीदों के छाँव में

उसकी आँखों के सामने ठेले पर ठोकरें बिकने लगती हैं –
घाव के भाव
और उसके आँसुओं के मूल्य तय करती है
उस बाजार की बोली
खेत की खूँटियाँ कह रही हैं
उसके घाव की जननी वे नहीं हैं
वे सड़कें हैं जिससे वह गया है उस मंडी !

कवि का परिचय
नाम-गोलेन्द्र पटेल
ग्राम-खजूरगाँव, पोस्ट-साहुपुरी, जिला-चंदौली, उत्तर प्रदेश,
शिक्षा-काशी हिंदू विश्वविद्यालय के छात्र (हिंदी आनर्स)।
मोबाइल-8429249326, ईमेल : corojivi@gmail.com

Bhanu Prakash

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भानु बंगवाल
मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।