ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी से गूंजा सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी का संदेश
सीएसआईआर नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी के निदेशक डा. वेणुगोपाल अचन्ता ने कहां की 2030 तक भारत की आधी ऊर्जा नवीकरणीय स्रोतों से आएगी जिससे देश स्मार्ट टेक्नोलॉजी की ओर अग्रसर होगा। वह आज ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इस सम्मेलन का आयोजन निर्माण से जुड़ी आधुनिक तकनीकों का सार पर किया गया था। उन्होंने कहा की 2030 तक हमारी 50 प्रतिशत ऊर्जा और बिजली उत्पादन नवीकरणीय स्रोतों से होगा। इसी दिशा में सौर ऊर्जा सबसे तेजी से आगे बढ़ रही है। हमारा लक्ष्य हर वर्ष 50 गीगावॉट क्षमता की स्थापना करना है। डा. अचंता ने कहा स्मार्ट टेक्नोलॉजी ग्रीन मैटेरियल्स और टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से भारत वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ सकता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
सम्मेलन में ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी के कुलपति डा. नरपिन्दर सिंह ने छात्र-छात्राओं से कहा कि आज के छात्र केवल कल के वैज्ञानिक और इंजीनियर नहीं बल्कि भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता के असली निर्माता है। यदि आप साहस के साथ सपने देखते हैं और उन्हें नवाचार व शोध से हकीकत का रूप देते हैं तो पूरी दुनिया न केवल आपके विचारों को अपनाएगी बल्कि वही विचार आने वाले कल में भारत की वैश्विक पहचान तय करेंगे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
यूजीवीएनएल के कार्यकारी निदेशक इंजीनियर विवेक अटरिया ने कहा कि सतत् विकास की राह में स्मार्ट तकनीक और ऊर्जा का समन्वय अनिवार्य है। जल और ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सस्टेनेबल समाधानों का विकास ही आने वाली पीढियों को सुरक्षित भविष्य देगा। इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के सिविल इंजीनियरिंग विभाग और इटली की यूनिवर्सिटी ऑफ नेपल्स पार्थिनोप ने संयुक्त रूप से किया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इस अवसर पर ब्राजी़ल की फेडरल यूनिवर्सिटी, रियो दे जेनेरियो की प्रोफेसर ओलिविया क्यू एफ अरौजो, बीआईएस निर्देशक सौरभ तिवारी, एनआईसीएमआर दिल्ली के निर्देशक और प्रोफेसर डा. राजेश गोयल, यूकास्ट के महानिदेशक डा. दुर्गेश पंत, आईआईटी दिल्ली के इंजीनियर डा. सौविक दास, सिविल इंजीनियरिंग के विभागाध्यक्ष डा. केके गुप्ता, डा. करण सिंह, डा. प्रवीण टीआर, दीपक सिंह समेत अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। सम्मेलन का संचालन डा. दीपशिखा शुक्ला ने किया।
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