सरकार ने छोड़ दी थी उम्मीद, हिंदुस्तान के मुफ्ती ने लगाई ताकत, हिंदू लड़की को फांसी से फंदे से बचाया
यमन से भारतीय नर्स निमिषा प्रिया के मामले में बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। यमन के स्थानीय अधिकारियों ने निमिषा प्रिया को मिलने वाली फांसी की सजा को स्थगित कर दिया है। यमन में निमिषा प्रिया को आज बुधवार 16 जुलाई 2025 को फांसी की सजा दी जानी थी। उसे स्थानीय अधिकारियों ने एक व्यक्ति की हत्या के जुर्म में मौत की सजा सुनाई थी। निमिषा के घरवालों और उसके समर्थकों के लिए ये राहत भरी खबर सामने आई है। ये उन लोगों को भी सबक है, जो एक विचारधारा को लेकर लोगों को आपस में बांटने की कोशिश करते हैं। वहीं, इस महिला को बचाने के लिए मुस्लिम लोगों का आगे आना ही सांप्रदायिक सौहार्द की असली मिसाल है। इस मामले में ये भी साफ कर देना जरूरी है कि भारत सरकार ने भी इस मामले में काफी प्रयास किए, लेकिन सरकार भी इस महिला को बचाने की उम्मीद खो चुकी थी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
ये है मामला
केरल के पलक्कड़ की रहने वाली निमिषा प्रिया पर 2017 में यमनी नागरिक तलाल अब्दो महदी की कथित हत्या का आरोप है। निमिषा 2012 में नर्स के तौर पर यमन चली गई थीं और उनके पति टॉमी भी यमन में रहते थे। जानकारी के मुताबिक उन्होंने तलाल के साथ मिलकर एक क्लिनिक शुरू की थी। इस बीच उनके पति और बेटी भारत लौट आए, लेकिन यमन में युद्ध छिड़ जाने के कारण निमिषा उनके साथ नहीं आ सकीं। इससे वह कथित तौर पर उस यमनी नागरिक तलाल के जाल में फंस गईं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
तलाल को इंजेक्शन देकर किया बेहोश
तलाल ने निमिषा और एक अन्य यमनी महिला का कथित तौर पर गंभीर शारीरिक और मानसिक शोषण किया। उनके पासपोर्ट भी जब्त कर लिए। हताश होकर निमिषा और उस यमनी महिला ने उसे एक इंजेक्शन देकर बेहोश कर दिया और अपने पासपोर्ट छीनकर भागने की कोशिश की। बाद में तलाल का शव उनके क्लिनिक में मिला। हालांकि, पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया और जेल में डाल दिया। इस कारण उन पर हत्या का आरोप लगाया गया और बाद में मुकदमा चलाया गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
निमिषा यमन की निचली अदालत में अपनी बेगुनाही साबित नहीं कर सकीं और उन्हें यमन की अदालत ने 2018 में निमिषा को मौत की सजा सुनाई, जबकि यमनी महिला को आजीवन कारावास की सजा मिली। इस फैसले के खिलाफ निमिषा ने यमन के सुप्रीम कोर्ट में अपील की, लेकिन उनको वहां से भी निराशा हाथ लगी और देश की सु्प्रीम अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी। 2023 में यमन के सुप्रीम कोर्ट ने भी निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। हाल ही में यमन के राष्ट्रपति रशद अल-अलीमी ने भी इस सजा पर अपनी मुहर लगा दी है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
भारत सरकार ने किए ये प्रयास
भारत सरकार ने इस मामले को बहुत जटिल मामला बताया था। केंद्र सरकार ने सोमवार 14 जुलाई, 2025 को सुप्रीम कोर्ट को आश्वासन दिया कि वह मलयाली नर्स निमिषा प्रिया की जान बचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने सर्वोच्च न्यायालय से कहा था कि भारत सरकार इसमें ज्यादा कुछ नहीं कर सकती। हमने जो भी संभव था, वह किया। उन्होंने कहा कि एकमात्र रास्ता यह है कि (यमनी व्यक्ति का) परिवार ‘रक्त-धन’ स्वीकार करने के लिए सहमत हो जाए। कुरान में वर्णित वित्तीय मुआवजे के तहत किसी मारे गए व्यक्ति की क्षमा के लिए उसके परिवार को दिया जाना चाहिए। वहीं, मारे गए व्यक्ति के परिवार के पास इस ‘रक्त-धन’ को स्वीकार या अस्वीकार करने का अधिकार सुरक्षित है। इस्लामी कानून के अनुसार, अगर मारे गए व्यक्ति का परिवार ‘रक्त-धन’ स्वीकार कर लेता है, तो सुश्री प्रिया को फाँसी नहीं दी जा सकती। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
शीर्ष विधि अधिकारी ने कहा कि पीड़ित परिवार के साथ बातचीत फिलहाल “कुछ हद तक ठप” सी लग रही है। हालाँकि, अटॉर्नी जनरल वेंकटरमणी ने सुझाव दिया कि अगर उन्हें और पैसे देने की बात हो, तो और बातचीत की गुंजाइश हो सकती है और कोई संभावित समाधान भी निकल सकता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
ऐसे हुए प्रयास
खबरों के मुताबिक, केरल के प्रभावशाली सुन्नी मुस्लिम नेता कंथापुरम ए पी अबूबकर मुसलियार और भारत सरकार के हस्तक्षेप से हो रही बातचीत के बाद यमन के स्थानीय अधिकारियों ने निमिषा की सजा स्थगित कर दी है। भारत के ग्रैंड मुफ्ती शेख अबूबकर मुसलियार ने जाने-माने यमनी धर्मगुरु शेख उमर बिन हाफिज से संपर्क किया। ताकि वे प्रिया के यमनी नियोक्ता और हत्या के शिकार हुए तलाल के परिवार के साथ मध्यस्थता कर सकें। निमिषा इस समय यमन की हूती विद्रोहियों के कब्ज़े वाली राजधानी सना में हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
मामले में सरकार के साथ ही केरल के प्रभावशाली सुन्नी मुस्लिम नेता कंथापुरम ए पी अबूबकर मुसलियार ने भी यमन में बातचीत की पहल की। मुसलियार के जरिये यमन के एक प्रमुख सूफी विद्वान शेख हबीब उमर बिन हफीज के प्रतिनिधि और मृतक तालाल अब्दो महदी के परिवार के बीच बातचीत हुई। इस बीच मुसलियार ने यमन सरकार से अनुरोध किया था कि, जब तक ये बातचीत चल रही है, तब तक निमिषा प्रिया की फांसी को टाल दिया जाए। ऐसे में फिलहाल सजो को स्थगित कर दिया गया है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
ब्लड मनी पर चल रही बात
यमन में लागू शरिया कानून के तहत हत्या के मामलों में ब्लड मनी (मुआवजा) का विकल्प होता है। इसमें आरोपी के परिवार को मृतक के परिवार को वित्तीय मुआवजा देना होता है। अगर मृतक का परिवार यह मुआवजा स्वीकार कर लेता है, तो मौत की सजा को रोका जा सकता है। अब तक मृतक तालाल के परिवार से संपर्क करना असंभव माना जा रहा था। मगर अब यह बात बन गई है। क्योंकि मृतक के परिवार का एक करीबी सदस्य होदेइदाह राज्य न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश और यमनी शूरा काउंसिल का सदस्य है, वह बातचीत में शामिल हो गया है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
पहले भी की गई थी पेशकश
2020 में जब पहली बार निमिषा की सजा-ए-मौत की खबर केरल पहुंची, तभी केरल के मुस्लिमों के साथ ही बहुत सारे लोग उसे बचाने के लिए समाने आए। उन्होंने सेव निमिषा प्रिया काउंसिल नाम से मुहीम चलाई थी। इसी काउंसिल ने ब्लड मनी के तौर पर करीब एक मिलियन डॉलर यानि तकरीबन 8.5 करोड़ रुपयों का इंतजाम भी कर लिया। दिक्कत ये है कि ब्लड मनी तब दी जाती है जब पहले परिवार माफी दे दे। मेहदी के परिवार ने अब तक निमिषा को माफ नहीं किया है। अब बताया जा रहा है कि चंदे के जरिये ब्लड मनी के लिए करीब 11 करोड़ रुपये की व्यवस्था कर ली गई है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
पीड़ित परिवार हुआ सहमत
शेख उमर बिन हाफिज ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और अपने छात्रों को तलाल के परिवार से व्यक्तिगत रूप से मिलने के लिए भेजा। कई दौर की गहन बातचीत के बाद पीड़ित परिवार अंततः फांसी को फिलहाल रोकने पर सहमत हो गया, जिससे प्रिया और उनकी कानूनी टीम को नई उम्मीद मिली।
नोटः सच का साथ देने में हमारा साथी बनिए। यदि आप लोकसाक्ष्य की खबरों को नियमित रूप से पढ़ना चाहते हैं तो नीचे दिए गए आप्शन से हमारे फेसबुक पेज या व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ सकते हैं, बस आपको एक क्लिक करना है। यदि खबर अच्छी लगे तो आप फेसबुक या व्हाट्सएप में शेयर भी कर सकते हो।



