अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच ने सीबीआई कार्यालय का किया घेराव, दिया सात दिन का अल्टीमेटम
अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच के बैनर तले देहरादून स्थित सीबीआई कार्यालय का घेराव कर अंकिता भंडारी प्रकरण की जांच में हुई प्रगति के संबंध में विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया। प्रदर्शनकारियों ने सीबीआई से मांग की कि छह माह से चल रही जांच की वर्तमान स्थिति को सार्वजनिक किया जाए तथा जांच से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों के स्पष्ट उत्तर दिए जाएं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
प्रदर्शन के दौरान मंच के कार्यकर्ताओं ने जोरदार नारेबाजी करते हुए अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग उठाई। प्रारंभ में सीबीआई अधिकारियों ने कार्यालय का गेट बंद कर दिया तथा प्रदर्शनकारियों को भीतर जाने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद प्रदर्शनकारियों और अधिकारियों के बीच झड़प हुई, जिसके उपरांत चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को सीबीआई कार्यालय के भीतर बुलाया गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
प्रतिनिधिमंडल में कमला पंत, निर्मला बिष्ट, सुजाता पॉल तथा मोहित डिमरी शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने सीबीआई के डीएसपी अजय मिश्रा एवं डीएसपी सुभाष चंद्र से मुलाकात कर जांच में देरी और सीबीआई की कार्य प्रणाली पर असंतोष व्यक्त करते हुए ज्ञापन सौंपा। मुलाकात के दौरान सीबीआई अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में एफआईआर दिल्ली में दर्ज की गई है। मंच ने कहा कि यदि ऐसा है तो एफआईआर की प्रति उपलब्ध कराई जानी चाहिए तथा जांच की वर्तमान स्थिति भी सार्वजनिक की जानी चाहिए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
सीबीआई अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि मंच द्वारा सौंपे गए ज्ञापन और उसमें उठाए गए सभी प्रश्नों एवं चिंताओं को दिल्ली स्थित सीबीआई मुख्यालय के सक्षम अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा। ज्ञापन में मंच ने सीबीआई से पूछा है कि छह माह की जांच के दौरान अब तक क्या प्रगति हुई है। क्या दुष्यंत गौतम एवं अजय कुमार से पूछताछ की गई है। क्या अंकिता के माता-पिता द्वारा उठाए गए प्रश्नों को जांच का हिस्सा बनाया गया है। क्या उर्मिला सनावर द्वारा सार्वजनिक रूप से उठाए गए मुद्दों पर जांच हुई है। तथा क्या साक्ष्य मिटाने अथवा जांच को प्रभावित करने के आरोपों की भी जांच की गई है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
मंच ने यह भी मांग की कि जांच की वर्तमान स्थिति, आगे की कार्ययोजना तथा जांच पूर्ण होने की संभावित समय-सीमा के बारे में स्पष्ट जानकारी दी जाए। अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच ने सीबीआई को 7 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि एक सप्ताह के भीतर संतोषजनक उत्तर नहीं दिया जाता है, तो मंच व्यापक जनभागीदारी के साथ आंदोलन के अगले चरण की घोषणा करेगा तथा देहरादून स्थित सीबीआई कार्यालय की तालाबंदी अभियान शुरू करेगा। इसके लिए संपूर्ण जिम्मेदारी सीबीआई प्रशासन की होगी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
प्रदर्शन एवं घेराव कार्यक्रम में पदमा गुप्ता, मंजू बलोदी, बिमला, स्मृति नेगी, सुशीला अमोली, पुष्पा नौडियाल, गीता बागड़ी, हिलता नेगी, ज्योति नेगी, मीणा राणा, यशोदा, शांता नैथानी, प्रेमलता बलूनी, शांति सेमवाल, सतेश्वरी देवी आदि कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने भाग लिया। मंच ने कहा कि अंकिता भंडारी प्रकरण केवल एक परिवार का नहीं बल्कि उत्तराखंड की बेटियों की सुरक्षा, न्याय और जनता के विश्वास का प्रश्न है तथा इस मामले में जवाबदेही सुनिश्चित होने तक संघर्ष जारी रहेगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
कमला पंत का वक्तव्य
अंकिता भंडारी प्रकरण केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास का प्रश्न है। हमारा उद्देश्य किसी निष्कर्ष पर पहुँचना नहीं, बल्कि यह जानना है कि जांच किस स्थिति में है और जिन सवालों को परिवार तथा समाज लगातार उठा रहा है, उनका परीक्षण किस प्रकार किया जा रहा है।
सुजाता पाल का वक्तव्य
छह माह का समय बीत जाने के बाद भी जांच की प्रगति को लेकर अनेक प्रश्न बने हुए हैं। हमारा मानना है कि पारदर्शिता से ही जनता का विश्वास मजबूत होता है। इसलिए हमने सीबीआई से जांच की वर्तमान स्थिति और आगे की प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट जानकारी देने का अनुरोध किया है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
निर्मला बिष्ट का वक्तव्य
किसी भी लोकतांत्रिक समाज में न्याय की प्रक्रिया जितनी निष्पक्ष होनी चाहिए, उतनी ही पारदर्शी भी होनी चाहिए।
उमा भट्ट का वक्तव्य
अंकिता भंडारी प्रकरण ने समाज में अनेक गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। हमारा मानना है कि जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमित जानकारी उपलब्ध कराना आवश्यक है, ताकि पीड़ित परिवार और आम नागरिकों का विश्वास बना रहे। हम न्यायपूर्ण और निष्पक्ष जांच की अपेक्षा करते हैं तथा इसी उद्देश्य से अपनी बात लोकतांत्रिक तरीके से रख रहे हैं।
मोहित डिमरी का वक्तव्य
हमारा प्रयास केवल इतना है कि पीड़ित परिवार और समाज को यह भरोसा मिले कि जांच सभी आवश्यक पहलुओं को ध्यान में रखकर आगे बढ़ रही है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
अंकिता भंडारी हत्याकांड
बता दें कि पौड़ी जिले के यमकेश्वर प्रखंड के अंतर्गत गंगा भोगपुर स्थित वनन्तरा रिसोर्ट से 18 सितंबर 2022 की रात से संदिग्ध परिस्थितियों में रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी लापता हो गई थी। पुलिस ने जब जांच की तो पता चला कि हत्या कर उसका शव चीला नहर में फेंक दिया गया था। इस मामले में रिसोर्ट मालिक पुलकित आर्य, प्रबंधक सौरभ भास्कर और सहायक प्रबंधक अंकित गुप्ता को गिरफ्तार किया था। मुख्य आरोपी पुलकित आर्य पूर्व बीजेपी नेता और पूर्व मंत्री विनोद आर्य का बेटा है। पुलकित आर्य रिजॉर्ट का मालिक है। विनोद आर्य और उनके दूसरे बेटे अंकित आर्य को बीजेपी ने निष्कासित कर दिया था। इस मामले में चर्चा ये भी रही कि किसी वीआईपी को खुश करने के लिए अंकिता पर दबाव बनाया जा रहा था। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इस मामले में राजनैतिक रूप से प्रभावशाली व्यक्तियों के शामिल होने और ढ़ंग से जाँच नहीं होने के कारण राष्ट्रीय स्तर पर प्रचार मिला। अंकिता की माँ के दावों से मामले को अधिक तूल मिला। पुलिस के आरोप में प्रभावशाली व्यक्तियों के शामिल होने के दावे को शामिल नहीं किया। आज तक वीआईपी के नाम का खुलासा नहीं हुआ। इस मामले के प्रमुख अभियुक्त पुलकित आर्य (रिज़ॉर्ट के मालिक), अंकित गुप्ता (रिज़ॉर्ट के सहायक प्रबंधक) और सौरभ भास्कर (रिज़ॉर्ट के प्रबन्धक) हत्या की बात कबूल कर ली। कोटद्वार कोर्ट में हुई सुनवाई में तीनों को उम्र कैद की सजा सुनाई गई है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इस मामले में नया खुलासा बीजेपी के पूर्व विधायक सुरेश राठौर की दूसरी पत्नी उर्मिला सनावर ने वीआईपी के नाम को लेकर किया। इसका वीडियो सोशल मीडिया में डाला गया। इसमें दावा किया गया कि वीआईपी बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री एवं प्रदेश प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम हैं। साथ ही राज्य में बीजेपी के एक पूर्व महामंत्री संगठन का नाम भी इस प्रकरण से जोड़ा गया है। ऐसे में नाम सामने आने के बाद इस हत्याकांड में सैकड़ों सवाल खड़े हो गए हैं। वहीं, बीजेपी के प्रदेश के महामंत्री संगठन अजय कुमाार का नाम भी इस हत्याकांड में काफी समय पहले ही आ चुका है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इस खुलासे के बाद से ही हत्याकांड की हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में सीबीआई जांच कराने और वीआईपी सहित अन्य लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर विभिन्न संगठनों के साथ ही आम लोग सड़कों पर उतर गए थे। सीएम धामी ने इस मामले में सीबीआई जांच की संस्तुति केंद्र सरकार को भेजी है। ये संस्तुति एनजीओ चलाने वाले पर्यावरणविद् डॉ. अनिल जोशी की ओर से दर्ज एफआईआर के बाद की गई।
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Bhanu Bangwal
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।


