पहलगाम में आतंकी हमला, भारत ने दी पानी बंद करने की चेतावनी, पाकिस्तानी रेंजर्स ने बीएसएफ के जवान को हिरासत में लिया, फ्लैग मीटिंग जारी
जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के रिश्ते बहुत ज्यादा तल्ख हो चुके हैं। इस हमले में पाकिस्तान का हाथ होने के सबूत माने जा रहे हैं। ऐसे में भारत ने बुधवार को पाकिस्तान का पानी बंद करने के साथ ही पांच बड़े फैसले लिए। इससे जवाब में बौखलाए पाकिस्तान ने भी भारत के साथ सभी द्विपक्षीय समझौते रद्द करने का फैसला लिया है। इस तल्खी के बीच अब एक और बड़ी खबर सामने आई है। खबर है कि भारत के बीएसएफ के एक जवान को पाकिस्तान रेंजर्स ने हिरासत में लिया है। भारत का यह जवान गलती से पाकिस्तान के क्षेत्र में चला गया। अब रिहाई के लिए फ्लैग मीटिंग हो रही है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
सीमा सुरक्षा बल (BSF) के एक जवान को गलती से पंजाब की सीमा पार कर जाने के बाद उसे पाकिस्तान रेंजर्स ने हिरासत में ले लिया। अधिकारियों ने गुरुवार को यह जानकारी दी। एक अधिकारी ने बताया कि जवान की रिहाई के लिए दोनों देशों के बलों के बीच बातचीत जारी है। उन्होंने बताया कि 182वीं बटालियन के कांस्टेबल पीके सिंह को बुधवार को फिरोजपुर सीमा पार से पाकिस्तान रेंजर्स ने हिरासत में ले लिया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
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अधिकारी ने बताया कि जवान वर्दी में था और उसके पास सर्विस राइफल भी थी। उन्होंने बताया कि बीएसफ जवान किसानों के साथ था और वह छाया में आराम करने के लिए आगे बढ़ा। इसके बाद उसे पाकिस्तानी रेंजर्स ने पकड़ लिया। अधिकारियों ने बताया कि बीएसएफ जवान की रिहाई के लिए दोनों देशों के बलों के बीच फ्लैग मीटिंग जारी है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने बताया कि ऐसी घटनाएं असामान्य नहीं हैं और दोनों पक्षों के बीच पहले भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं। अधिकारी ने बताया कि यह घटना पहलगाम आतंकी हमले की पृष्ठभूमि में हुई है, जिसके बाद भारत ने आतंकवाद को प्रायोजित करने को लेकर पाकिस्तान के खिलाफ कई कदम उठाए हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
भारत ने लिए कई निर्णय
पहलगाम में आतंकवादी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया है। भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़े कदम उठाए हैं। इसके तहत भारत ने सिंधु जल संधि को रद्द कर दिया। इसके आलावा भारत ने सार्क वीजा भी रद्द कर दिया है और भारत में रह रहे पाकिस्तानियों को 48 घंटे के अंदर देश छोड़ने का आदेश दे दिया गया है। हालांकि, पानी बंद करने के निर्णय को अमल में लाना आसान नहीं होगा। कारण ये है कि सिंधु जल संधि विश्ववैंक की मध्यस्थता में हुई थी। साथ ही तकनीकि दृष्टि से भी ये अव्यवहारिक लगता है। क्योंकि इसके लिए व्यवस्थाएं बनाने में ही दस साल से ज्यादा का समय लग सकता है। यदि याददाश्त कमजोर है तो वर्ष 2019 में पुलवामा हमले के दौरान की चेतावनी को याद कर लीजिए। तब भी भारत सरकार ने पाकिस्तान का पानी बंद करने की घोषणा की थी। छह साल बाद भी इसे अमल में नहीं लाया जा सका है।
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