नदियां नदियां चलकर घर तक आईं। घर भी डरकर कांपे थर - थर। माटी के घर हैं जो जर्जर। आफ़त...
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बादलों का शामियाना आसमान में तन गया बादलों का शामियाना। सांवली छांव भी पसर गई धरा पर। कंटीली धूप भी...
स्त्री, औरत और महिला में क्या अंतर है? हमारी भाषा में सच तो यही है कि दो शब्द एक दूसरे...
रावण! रावण दहाड़ रहा है, सत्य के विरुद्ध मन के स्याह कोनों में! बाहर खड़ी है, कतारबद्ध, डरी-सहमी भीड़! उम्मीदें...
यूपी में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के भोजपुरी अध्ययन केंद्र के राहुल सभागार में डॉ रविशंकर उपाध्याय स्मृति संस्थान, वाराणसी के...
प्रकृति की सुरम्य रंगस्थली अल्मोड़ा के कौसानी में चाय बागान के व्यवस्थापक गंगा दत्त पंत के घर में 20 मई...
मैली मैली झीनी चकर ने छीनी रे छीनी... मैली मैली झीनी ये झीनी... काल ने छीनी रे छीनी... मैली मैली...
कितना कितना झूठ है मेरे चारों ओरसच है जो भी, झूठ पर टिकाउक्ताहट की स्थितियों मेंसबसे बड़ा सहारा हैतोड़ने को...
देखना…एकदिन सुबह फिर मुस्कुराएगी चारों ओर अंधेरा घनाआकाश काले बादल सनारातें लम्बी उदासी भरीलेकिन शीघ्र स्थितियां सुधर जाएगी देखना..सुबह फिर...
दर्पणप्रतिबिंब देखने को पूरा दर्पण आधा पूरा हैलेकिन दूरी तय कर लो तो उसके बिना अधूरा हैदर्पण के हो बहुत...
