क्यों राष्ट्र के भक्षक-रक्षक से पराक्रम का प्रमाण माँगते हैं, संविधान प्रदत्त अभिव्यक्ति की सारी सीमायें लाँघते हैं।। जला रहे...
Literature
अगर कभी-भी नहीं मिले तो अगर कभी कुछ कहा नहीं तो - बात कैसे है ? अगर कभी कुछ सुना...
मौ बीतीगे फागुण लैगे, बीटा पाख्यूं मा फ्यूँली खिलीगे। ऊँची डाण्डियों मा बुराँश खिलीगे, पञ्चमी कू ऐगि त्योहार, दगड़्यों फागुण...
हर व्यक्ति की पहचान अलग-अलग तरीके से होती है। किसी की पहचान में व्यक्ति की खुद की आदत, स्वभाव या...
कह रहा हिमालय अब भी समय है कह रहा हिमालय अब भी समय है, जागो - जागो देर न हो...
कोई काम देखने से काफी आसान लगता है, लेकिन जब करने बैठो तब ही उसकी अहमियत नजर आती है। आसान...
देख तबाही के मंजर को, व्यथित हृदय क्यों टूट रहा ! धरती माता की चीखों से, नील नलय तक सिहर...
बदलते रिश्ते आधुनिक युग में अब कलयुग का कहर है जिसका भी तुम भला करना चाहो उसकी सोच में ही...
बौणूमां आग ना रो हिलासी, बौण की । पीर सुण्योणी तेरी, भौण की।। बौण बचौण, आला क्वी । तेरी हर्याली...
रेलगाड़ी की बर्थ का सन्देश तीन शून्य एक शून्य एस दो की पन्द्रह हूँ। खाली नहीं कभी रहती जो बर्थ...
