बुरा मान गए ज़रा आईना क्या दिखाया, बुरा मान गए। ज़रा चुनाव में क्या हराया, बुरा मान गए। चाहते तो...
Dehradun
वे दिन भी कितने सुंदर थे। पर वे दिन भी कितने सुंदर थे। जब बच्चे, बच्चे थे और वे अपने...
बादलों का शामियाना आसमान में तन गया बादलों का शामियाना। सांवली छांव भी पसर गई धरा पर। कंटीली धूप भी...
स्त्री, औरत और महिला में क्या अंतर है? हमारी भाषा में सच तो यही है कि दो शब्द एक दूसरे...
रावण! रावण दहाड़ रहा है, सत्य के विरुद्ध मन के स्याह कोनों में! बाहर खड़ी है, कतारबद्ध, डरी-सहमी भीड़! उम्मीदें...
प्रेत के पांव मुझे अक्सर संदेह होता है कि मैं आदमी हूं! क्योंकि रास्ते में गिर जाती है मेरी नाक,...
उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तथा मीडिया प्रभारी राजीव महर्षि ने समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर भाजपा सरकार...
मन पतवार बना लेती तुम होते जो सचमुच रुठे मैं तुम्हें मनाने आ जाती, नैया को मझधार छोड़ती मन पतवार...
थिरक थिरक... आ नाच बा नाच ला... बलि तुम कां छा ला....2 थिरक-थिरक नाच-नाच ला जम बे नाच ला...2 तकधिन......
ज़िंदगी लगी हांफने दौड - दौड़कर ज़िंदगी लगी हांफने। पथ लंबा मंज़िल अभी बहुत दूर है। थककर भी हम चलने...
