हक जाते देखकर भी चुप्पी किस काम की लगता है ताजे शोणित पर फिर से काई छाई है, लगता है...
साहित्य
नाकोईलाजशर्म... नाकोईदीनधर्म... पहले दिखते नेता पैदल, फिर दौड़ लगाते कारों में। हो रहे माला माल हैं नेता, माल छुपाये भकारों...
वो हंसते मुस्कुराते सुलझी हुई सी चेहरे की चमक कहां चली गई, चेहरा उदास लिये उलझनों से अपनी उलझे से...
अंट शंट हैगे हाये अंट शंट हैगे हाये...2 अंट शंट हैगे हाये...2 जिंदगी झंड पनि झंड हैगे हाये खालि खालि...
उत्तरायण में पुन: अभिनंदन है। बाल सूर्य उदित मकर राशि में, शैल शिखर सब अनुरंजित हैं। सुरकुट पर्वत तिरछी किरणों...
यह सतरंगी संस्कृति भारत की, पर्व लोहड़ी या हो मकर संक्रांति। आती पर्वों पर नित याद पुरानी, भारत माता की...
कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना। ये गाना मैने बचपन में सुना था। तब शायद इसका सही...
ना निकलेंगी कभी रात में बाहर, दो प्रमाण दिन के उजाले में सुरक्षित हैं स्त्री, जागरूकता और सम्मान ही स्त्री...
आजकल फैशन का जमाना है। इसके बगैर तो शायद ही कोई अपनी योग्यता का परिचय किसी को नहीं करा सकता।...
अक्ल के टप्पू, सिर पर बोझ घोड़े पर अप्पू। इस कहावत को मैं बचपन से ही पिताजी से मुख से...
