बाल कविता-पहली कक्षा हम हर दिन पढ़ने जाते हैं हम सब यह गाते हैं कलम के आगे झुकता है भाला...
साहित्य
मानव धर्म शिखा मैं हिन्दू हूं वह मुस्लिम है, यह दृष्टि बदल डालो। मानव हो तो मानवता का, दुःख दर्द...
शुक्रवार को देहरादून स्थित एनआईवीएच सभागार में सेव हिमालय मूवमेंट और संवेदना की ओर से आयोजित विद्यासागर सम्मान समारोह में...
गालीबाज संसद शर्मसार हो गई। प्रतिष्ठा तार- तार हो गई। लोकतंत्र की थी जो गरिमा बद होकर बाज़ार हो गई।...
बचपन अपना बचपन बचाके रखना। भूल न जाना बचपन के खेल। पल में झगड़ना पल में मेल। गुड्डा - गुड़िया...
मुझे मेरे हिस्से का आसमान चाहिए। मुझे मेरे हिस्से का आसमान चाहिए। थोड़ी सी जमीं नहीं सारा जहान चाहिए। मैं...
हम रोशनदान हैं! हम दीवार नहीं रोशनदान हैं। हमसे आती है रोशनी घर में। हमारी भाती है उपस्थिति घर में।...
टूट गया है जो ऐनक ये, ऐनक अब दिलाएगा कौन। ख़त्म होने को हैं दवाएँ, ये दवाएँ अब लाएगा कौन।।...
ज़िंदगी कंदील हो गई आईनों के शहर में चेहरों पर नक़ाब है। हवाओं को आने की इजाज़त नहीं है। ताका-झांकी...
आज हिमवंत कवि चन्द्र कुंवर बर्त्वाल की पुण्य तिथि एवं हिंदी दिवस का कार्यक्रम हिमवंत कवि चन्द्र कुवर बर्तवाल शोध...
