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July 23, 2026

गढ़वाली गजल

ज्यूंदु छूं स्वींणा सास- बिस्वास दिलांद, ज्यूंदु छूं. सुवेर उठि - अफथैं जपकांद, ज्यूंदु छूं.. धार-छोड़ौं फरि अयूं, आज सब्यूं...

ब्यटलौं क भोऽर चल़णू , हमरु घर- संसार च. ब्यटलौं मीलु ऊं कु अधिकार, आज दरकार च.. ब्यटलौं न दे-लाड-प्यार,...

रगड़ा-झगड़ा सोचु भिंडि च-हमन, जीवन म अपड़ा भी. क्य ब्वन-दगड़म चल़णा छिं, सौ रगड़ा भी.. मनखी सोच्यूं-अर गड़्यूं, कख तक...

रोज़ा उठा-पोड़ रोज़-रोज़ा उठा-पोड़ मा,दिन इनी ठिलेंणा छन. एक- हैंका दगड़ि, बोलि- चालिक बितेंणा छन.. एक समै छौ, रात-दिन काम-काजे...