धन दौलत आप की है के बाप की है... आप की है के बाप की है... लुटा रहे जो धन...
कवि
युद्ध अंधियारों से अब लड़ा न जाए। सूरज भी अब थका हुआ सा लगता। भुनसारे से कोहरा रोज़ डसता। युद्ध...
कोई दीया जलाया जाए बहुत अंधेरा है बंधु! कोई दीया जलाया जाए। रोशनी का पर्व है, रोशनी को घर बुलाया...
फिर वसंत होगा तानाशाही का भी अंत होगा। पतझड़ के बाद वसंत होगा। ज़ालिम कितने भी कहर बरपा ले देखना,...
बादलों की ओट से झांक रहा चांद। शरमाकर धरा निहार रही हौले से। स्वप्न बाहर आए नींद के डोले से।...
लाचार च त्यारू गौं भुलाओ उत्तराखण्ड का, धारा-पन्यारा बिसिकि गीं। धुर्पली का पाथर रैडिकि, ज़मीन म खिसिकि गीं। ल्यो देखो...
धुएं की चादर ओढ़े शहर पड़ा। शहर की तबीयत ठीक नहीं है। सेहतमंद में शरीक़ नहीं है। प्रदूषण सूचकांक आसमां...
राम को अपना धाम खोजने की क्या पड़ी जरूरत है। राम तो घट-घट के वासी हैं हर तन में उनकी...
ज़िन्दगी की धूप में मिला न कोई साया। तपते रहे दुपहर में खपरैलों की तरह। उधड़ते रहे फफोले थिगड़ैलों की...
रहते हैं हम डरे - डरे से। ज़िंदा रहकर मरे - मरे से। हरे - भरे थे जो खेत कभी...
