भारत भूमि को शत् शत् वंदन है पूजनीय है ये भारत भूमि तेरी वसुधा पर जन्म लिया है, नित पूजा...
कवि
क्या मेरे मन के आखर यूं ही क्या मेरे मन के आखर यूं ही, खुद में सिमटकर रह जाएंगे। लिखता...
मेरे शब्द मैं अपने शब्दों को लिख चुका हूं, क्या कोई, मेरे शब्द सुन सकेगा। फंसा हूं क्यों शब्दों के...
हिम कवि आ रहा घर छोड़े वर्षों बीत गए, मैं हिमगिरि पर ही घूम रहा। याद दिलाती मुझे बहुत उनकी,...
जिंदगी वतन के नाम क्या है इंसान बता तेरी ये जिंदगानी, जो काम ना आए वतन के। मौके तो बहुत...
स्वानी स्वानी... स्वानी स्वानी मुखड़ि तेरी स्वानी भलि झलकी छै... म्येरा मन बसि मूरत जसि उसि तेरी सूरत सुकली छै......
मैं टालता गया मैं टालता गया... जो अवसर आया... जो अवसर आया मैं टालता गया जो अवसर आया मैं टालता...
नाटक सुन चेतुआ ना रार कर... नाटक ना बार बार कर... सुंदर शब्दों का संचय कर नित जीवन अपना उदय...
तलाश मैं न जाने क्यों खुशी की, तलाश में यूं ही भटकता रहा। कभी वो न मिली मुझे मैं उसकी...
हृदय में बह रही प्रेम की धारा आज न जानें मेरे हृदय में क्यों, बह रही प्रेम की रस धारा।...
