राम को अपना धाम खोजने की क्या पड़ी जरूरत है। राम तो घट-घट के वासी हैं हर तन में उनकी...
उत्तराखंड
रहते हैं हम डरे - डरे से। ज़िंदा रहकर मरे - मरे से। हरे - भरे थे जो खेत कभी...
हम कहें, तुम सुनो; तुम कहो, हम सुनें आओ! बैठो बातों का स्वेटर बुने। उम्र का छौना भागा जा रहा...
उत्तराखंड के प्रसिद्ध रंगकर्मी और गायक आलोक मलासी की आवाज में उनका नया गढ़वाली गीत सुनिए। इस गीत-सरू सरू, को...
देहरादून में ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में आयोजित कार्यक्रम में डिजिटल डिजाइन में एस रैम बिटसैल तकनीक के बेहतरीन उपयोगों...
एक - एक वोट को आसमां से गिर वे, खजूर में अटक रहे हैं। एक - एक वोट को जो,...
देख तमाशा हँसता है सच खाना-दाना ढूँढ रहा सच, कलयुग की खलिहानों पर। देख तमाशा हँसता है सच, दो दिन...
घर के बिना झूठ हमसे कहा नहीं जाता। सत्य उनसे सहा नहीं जाता। भले हमारे ख़िलाफ़ हो हवा उसके संग...
हमने बीने पत्तल जंगल के राहों में कोई मारा पत्थर बीच बीच बाजारों में चूल्हे के अंगीठियों में हमने झोंके...
गांव नहीं छूटा हमसे आज भी गांव नहीं छूटा। जिस गांव में हमने देखे सपने। उन्हें सच किया वो ग़ैर...
