फिर उसने जिंदगी से अलविदा कह दिया होगा फ़ुर्सत के पलों मे बैठकर सोंचती हूँक्यों कोई अपनी जिंदगी से रुख्सत...
कविता
मैं सरकस का सिंह रहा सुखमय मम जीवन।मिला किंतु अब बड़ा कठिन ही है यह कानन।।बिना कष्ट था भोजन मिलता...
अपने अंदर छुपा दिया,या जाने कहाँ गुमा दिया,तू वैसा का वैसा फिर मुझको क्यों बदल दिया।दर्पण बता बचपन कहाँ? वो...
जहां रहता हूं आसपास जो खेत हैउनमे फसलों का उगनानिरंतर उगते रहने को कह रहा है जहां मै रह रहा...
सड़क किनारे जिंदगी मूक देखती रह जाएगी खून से सने हाथों से गिरेबाँ पकड़ी जाएगी,सामंती तलवारें नन्हें हाथों में लहराएंगी,गठजोड़ों...
कूड़ा बीनने वाले हर शहर मेसूरज से पहलेउठकर सड़को पर आ जाते हैंकुछ बच्चेकंधे पर लाद कर बोरियांबिना चप्पल कुछतेज...
पापामैं जानती हूं तुम भूखे होफिर क्यों तुम खुद को भूखे नहीं बताते होतपती धूप में पसीने से नहाकरक्यों तुम...
विषय -मंजिल डरते क्यों हो तुम उलझनों सेतुम राह पर चलना तो सीखोदूर नहीं अब कहीं मंजिलतुम ये सोचकर तो...
मध्य हिमालै ? ऊंचा हिवांळों ह्यूं की चादर,रूमझुम बरखा मध्य हिमालै ।धारूं - धारूं बादळ माळा ,ठंडु बथौऊं मध्य हिमालै...
ख्वाहिश मैंने भगवान से मांगी शक्ति,उसने मुझे दी कठिनाइयांहिम्मत बढ़ाने के लिए !मैंने भगवान से मांगी बुद्धि ,उसने मुझे दी...
