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October 17, 2026

अंतरराष्ट्रीय बाल दिवस पर पढ़िए डॉ. अतुल शर्मा की कविता-कूड़ा बीनने वाले

कूड़ा बीनने वाले

हर शहर मे
सूरज से पहले
उठकर सड़को पर आ जाते हैं
कुछ बच्चे
कंधे पर लाद कर बोरियां
बिना चप्पल कुछ
तेज रफ्तार से
चलते हुए
पहुचते है
कुड़ाघरों तक

वह बतियाते है
हंसते और रोते है
वे पढते है
कूडे़दान की बाते
खाते हैं
इससे ही
सांस लेते है इन्ही के बीच

हमारे आसपास के ही बच्चे होते हैं यह

कूडे़ से भरे भरे
आज को
भविष्य तक ले जाते है अपने साथ

कूड़ा बीनने वाले बच्चों के
हिस्से मे आता है
फेका हुआ सामान
उसे ही वे बेचते हैं
एक दुकान मे
मिलता है उससे जो
उसी से
भरा होता है उनका पेट

यह बचपन मे ही
बूढे हो जाने वाले बच्चों की बातो मे
होता ही है देश दुनियां का हाल
जैसी भी बाते वे देख पाते है
आंखो से
और आंखो के बिना भी

वे जहां रहते है
वहा की छत क ई बार तिरपाल की होती है और क ई बार नही

बरसात और हर मौसम
उनकी नींद मे घुस जाता है

दुनिया भर के ऐसे बच्चों के लिए
कौन बना रहा है ऐसी दुनियां

उन्ही मे से
एक दिन
उगेगा एक सूरज
जो खिलखिला उठेगा

देखेगे हम कि क्या कभी
हथेलियों से भी
उगेगा सूरज ।

कवि का परिचय
डॉ. अतुल शर्मा (जनकवि)
बंजारावाला देहरादून, उत्तराखंड
डॉ. अतुल शर्मा उत्तराखंड के जाने माने जनकवि एवं लेखक हैं। उनकी कई कविता संग्रह, उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं। उनके जनगीत उत्तराखंड आंदोलन के दौरान आंदोलनकारियों की जुबां पर रहते थे।

पढ़ने के लिए यहां क्लिक करेंः अंतरराष्ट्रीय बाल दिवस छड़े लड़कों की दुर्दशा पर गजल-क्यों इस तरह छड़े पे तमाचा जमा दिया

Bhanu Prakash

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भानु बंगवाल
मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।