शिव सेना ठाकरे गुट से सांसद संजय राउत का दावा, महाराष्ट्र सरकार का डेथ वारंट जारी, 15 दिन में गिरेगी, अजीत पवार सीएम के काबिल
शिव सेना उद्धव ठाकरे गुट से सांसद संजय राउत ने बड़ा बयान दिया है। संजय राउत ने दावा किया है कि महाराष्ट्र में शिंदे-फडणवीस सरकार अगले 15 दिनों में गिर जाएगी। राउत ने कहा है कि इस सरकार का ‘डेथ वारंट’ जारी हो चुका है। राउत के इस दावे से एक बार फिर राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
संजय राउत ने कहा कि सब अपना-अपना गणित पेश कर रहे हैं, लेकिन हम नतीजे का इंतजार कर रहे हैं। राउत ने कहा कि मुख्यमंत्री और उनके 40 लोगों की फिलहाल जो हुकूमत है, वह अगले 15 से 20 दिनों में गिर जाएगी। मैंने एक बार कहा था कि फरवरी तक सरकार गिर जाएगी, लेकिन कोर्ट का फैसला देर से आ रहा है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा कि यह सरकार टिकने वाली नहीं है, इस सरकार का ‘डेथ वारंट’ जारी हो चुका है। राउत ने कहा है कि अब यह तय हो गया है कि कौन और कब हस्ताक्षर करेगा। दीगर है कि राउत का यह बयान ऐसे वक्त में आया है, जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता अजित पवार को लेकर अटकलों का दौर जारी है। हालांकि उन्होंने अपनी ओर से सफाई दे दी है कि वह एनसीपी में ही रहेंगे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
अजीत पवार सीएम के काबिल
राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने शनिवार को कहा कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता अजित पवार महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनने में सक्षम हैं। क्योंकि उनके पास व्यापक प्रशासनिक अनुभव है। एकनाथ शिंदे की ओर इशारा करते हुए राउत ने कहा कि कुछ अयोग्य लोग विभाजन करके राज्य के मुख्यमंत्री बन गए हैं। बता दें कि बीते साल जून में चालीस विधायकों ने विद्रोह कर लिया था, जिससे महाविकास अघाड़ी सरकार गिर गई थी। इन विधायकों का नेतृत्व शिंदे ने किया था। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा, कौन मुख्यमंत्री नहीं बनना चाहेगा? और अजित पवार मुख्यमंत्री बनने में सक्षम हैं। वह इतने सालों से राजनीति में हैं और कई बार मंत्री रह चुके हैं। उनके नाम सबसे अधिक बार उप मुख्यमंत्री के रूप में कार्य करने का रिकॉर्ड है। हर कोई सोचता है कि उनको मुख्यमंत्री बनना चाहिए। 23 नवंबर, 2019 को भारतीय जनता पार्टी के नेता देवेंद्र फडणवीस और पवार ने क्रमशः मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। हालांकि, 28 नवंबर को बहुमत साबित किए बिना सरकार गिर गई थी।



