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July 11, 2026

युवा कवि नवीन चन्द्र की कविता-एक मुलाकात

कभी वक्त हो, तो फुरसत से आना
वक्त के पहिए पर उलझन को समाना।
प्रेम के सागर मे शब्दो को सजाना
श्रद्धा-भक्ति के दीप को जलाना।
चौराहे की चकाचौंध मे मन को ना भटकाना
महफिल मे खडे अजनबी से दिल ना लगाना।
फिजूल की बातो से, टूट ना जाना
बीते हुए लम्हों से खुद से खुद को ही समझाना।
जब राह मेरी आना तो,बिखरी यादे समेट लाना
हँसीन चेहरे पर वो चमक लौट लाना।
रंगीन, मिजाज ओर मानवता समेट लाना
कभी मेरी राह आना तो बडे आराम से आना।
कभी मेरी राह आना तो चैन की नीद
जिज्ञासु प्रवृति, उत्सुक भाव को भी लाना।
कभी राह अगर मेरी आना तो
कल्पना के अम्बर मे दुनिया को बसाना।
कवि का परिचय
नवीन चन्द्र (रिंकेश)
नन्दा नगर घाट चमोली, उत्तराखंड।