एलिवेटेड रोड को लोकर जनसुनवाई में लोगों के साथ धक्का-मुक्की, बोलने नहीं देने का लगाया आरोप
देहरादून में रिस्पना और बिंदाल नदी के ऊपर प्रस्वावित एलिवेटेड रोड के निर्माण को लेकर की जा रही जनसुनवाई में विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों के लोग भी पहुंच रहे हैं। आरोप है कि ऐसे लोगों को अपना पक्ष रखने नहीं दिया जा रहा है। आरोप लगाया गया कि कांवली गांव में हुई जनसुनवाई में सत्ता पक्ष के लोगों की ओर से अपना पक्ष रखने आये लोगों के साथ धक्का मुक्की की गई। जनता का पक्ष रखने वालों को बोलने नहीं दिया गया। यही नहीं, वीडियो बना रहे लोगों के कैमरे छीनने का प्रयास किया गया। एक पत्रकार का तो चश्मा तक तोड़ दिया गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
गौरतलब है कि उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में रिस्पना और बिंदाल नदी के ऊपर एलिवेटेड रोज बनाने का प्रस्ताव है। इस परियोजना के प्रस्ताव को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी पारित कर दिया है। वहीं, कई विपक्षी दलों के साथ ही सामाजिक संगठनों की ओर से इन सड़कों का विरोध हो रहा है। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में पेड़ों के कटाने से देहरादून का पर्यावरण बिगड़ेगा। साथ ही नदी किनारे की बस्तियों के कई घरों में बुलडोजर चलेगा। मांग ये भी की जा रही है कि प्रभावितों को समुचित मुआवजा दिया जाए और उनके पुनर्वास की व्यवस्था की जाए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
कई माह से इस परियोजना को लेकर प्रदर्शन भी हो रहे हैं। वहीं, ये मामला हाईकोर्ट भी पहुंच गया है। हाईकोर्ट के निर्देश पर अब प्रभावित इलाकों में जनसुनवाई हो रही है। इसमें प्रशासन के अधिकारियों के साथ ही विभिन्न विभागों के अधिकारी पहुंच रहे हैं। वहीं, स्थानीय लोग भी मौके पर पहुंचकर अपना पक्ष रख रहे हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
कांवली गांव में हुई जनसुनवाई में पहुंचे लोगों ने दावा किया कि अधिकारियों, बीजेपी के विधायकों, पार्षदों और बीजेपी कार्यकर्ताओं के अलावा किसी भी प्रभावित ने एलिवेटेड रोड का समर्थन नहीं किया। कई घंटे तक भाजपा नेताओं की भाषणबाजी के बाद जब आम लोग बोलने लगे, तो विधायक खजान दास के इशारे पर लोगों को बोलने से रोका गया। एक सामाजिक कार्यकर्ता जब जनता का पक्ष रख रहे थे और एलिवेटेड रोड के विरोध में अपनी बात रख रहे थे, तो उनसे माइक छीन लिया गया। बीजेपी के लोगों की इस मनमानी के कारण ज्यादातर लोग सुनवाई का बहिष्कार कर बाहर चले गये। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
वहां मौजूद कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जब लोगों को बोलने का मौका देने की मांग की, तो उन्हें यह कहकर बाहर जाने के लिए कहा गया कि वे बस्ती के रहने वाले नहीं हैं। जब उन्होंने कहा कि वे इसी शहर के रहने वाले हैं तो भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनके साथ धक्का-मुक्की की। वरिष्ठ पत्रकार त्रिलोचन भट्ट जब महिला पार्षद के सामने अपनी मांग रख रहे स्थानीय लोगों की वीडियो बना रहे थे तो पार्षद ने कैमरा छीनने का प्रयास किया। इस दौरान उनका चश्मा तक टूट गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
लोगों ने कहना है कि जनसुनवाई में लोगों को बोलने ना देने से साबित होता है कि बीजेपी के लोग जनसुनवाई की सच्चाई बाहर नहीं आने देना चाहते। उत्तराखंड इंसानियत मंच और दून समग्र विकास मंच की ओर से जनसुनवाई में प्रो. राघवेंद्र, रमन्ना, चंद्रकला, दीपा कौशलम्, विमला कोली, हरिओम पाली आदि शामिल थे। दून समग्र विकास मंच और उत्तराखंड इंसानियत मंच का कहना है कि एलिवेटेड रोड से पूरा देहरादून प्रभावित हो रहा है। इसलिए हर शहरवासी को जनसुनवाई में अपना पक्ष रखने का अधिकार है। सत्ताधारी पार्टी किसी को अपना पक्ष रखने से नहीं रोक सकती।
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