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September 4, 2026

भारी बारिश के बीच आंदोलनकारियों ने की सीबीआई कार्यालय की तालाबंदी, अंकिता भंडारी मामले में उठाए तीखे सवाल

वीरांगना अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर आज देहरादून स्थित सीबीआई कार्यालय सीमाद्वार (निकट आईटीबीपी) में उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में आंदोलनकारी पहुंचे। भारी बारिश के बावजूद महिलाओं, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं का सैलाब न्याय की मांग को लेकर सड़क पर उतरा और सीबीआई कार्यालय के समक्ष जोरदार प्रदर्शन किया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

पुलिस प्रशासन की ओर से सीबीआई कार्यालय के मुख्य द्वार पर भारी बैरिकेडिंग कर महिलाओं और आंदोलनकारियों को रोकने का प्रयास किया गया। इसके बावजूद आंदोलनकारी महिलाओं ने दूसरे प्रवेश द्वार तक पहुंचकर वहां भी प्रतीकात्मक तालाबंदी कर दी। इस दौरान सीबीआई अधिकारी अपने कक्षों से बाहर आए, लेकिन वे कार्यालय परिसर के अंदर ही मौजूद रहे और वहीं से आंदोलनकारियों के साथ वार्ता हुई। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

आंदोलनकारियों ने सीबीआई अधिकारियों के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल रखे और जांच की वर्तमान स्थिति पर जवाब मांगा। अधिकारियों के जवाबों से असंतुष्ट आंदोलनकारियों ने सीबीआई कार्यालय के मुख्य द्वार पर भी ताला जड़ दिया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच की ओर से घोषित सीबीआई कार्यालय तालाबंदी कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। प्रदर्शन के दौरान जोरदार नारेबाजी हुई। जनगीत गाए गए और आंदोलनकारियों ने कहा कि अंकिता न्याय यात्रा के दौरान जो संकल्प लिया गया था, उसे हर हाल में पूरा किया जाएगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

प्रदर्शन के दौरान “CBI जवाब दो”, “अंकिता भंडारी को न्याय दो”, “VIP को गिरफ्तार करो”, “दुष्यंत गौतम से पूछताछ कब करोगे?”, “अजय कुमार से पूछताछ करो”, “साक्ष्य मिटाने वालों को गिरफ्तार करो” जैसे नारे लगातार गूंजते रहे। भारी बरसात के बीच मौजूद लोगों ने धैर्यपूर्वक वक्ताओं की बातें सुनीं। वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि यह आंदोलन केवल अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने का नहीं, बल्कि उत्तराखंड की बेटियों की सुरक्षा, लोकतांत्रिक जवाबदेही और न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता की लड़ाई है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

 

आंदोलनकारियों ने कहा कि अंकिता भंडारी के माता-पिता पिछले लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें केवल आश्वासन मिले हैं। जनता अब सच जानना चाहती है और किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति को बचाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं करेगी। कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने कहा कि यह लड़ाई केवल अंकिता भंडारी के लिए नहीं, बल्कि उत्तराखंड की हर बेटी की सुरक्षा और न्याय के लिए है। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द स्पष्ट जवाब और ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

आंदोलनकारियों के मुख्य सवाल
1. आखिर अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले में कथित VIP कौन है?
2. दुष्यंत गौतम और अजय कुमार जैसे नाम सामने आने के बावजूद उनसे पूछताछ क्यों नहीं हुई?
3. मुख्यमंत्री के आदेश पर बुलडोजर कार्रवाई कर साक्ष्य मिटाने के आरोपों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
4. बुलडोजर चलाकर संभावित साक्ष्य मिटाने वालों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
5. छह महीने बाद भी सीबीआई जांच में क्या प्रगति हुई?
6. क्या सीबीआई ने अब तक उर्मिला सनावर, रेनू बिष्ट एवं अन्य लोगों से पूछताछ की है?
7. अंकिता भंडारी के माता-पिता को अब तक सीबीआई ने क्यों नहीं बुलाया? (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

प्रदर्शनकारियों में ये रहे शामिल
प्रदर्शन के दौरान उत्तराखंड महिला मंच की संयोजक कमला पंत, कांग्रेस नेत्री सुजाता पॉल, गढ़वाल सभा से निर्मला बिष्ट, पत्रकार त्रिलोचन भट्ट, मोहित डिमरी, मनीष केडिया, एडवोकेट अलमास सिद्दीकी, शंकर गोपाल, ललित उत्तराखंडी (उत्तराखंड टाइगर फोर्स), मनीष सुंदरियाल, विनोद कुमार धस्माना (उत्तराखंड समानता पार्टी) सहित कई सामाजिक एवं जनसंगठनों के प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखी। त्रिलोचन भट्ट और सतीश धौलखंडी ने मौजूद लोगों के साथ जनगीत भी गाए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

इस अवसर पर विमला कोहली, पदमा गुप्ता, ईश्वर शर्मा, शकुन्तला मुंडेपी, किरण पुरोहित, मातेश्वरी रजवार,मंजू बलौदी, भुवनेश्वरी कठैत, शांता नेगी, शांति सेमवाल, मंजू सेमवाल, पार्वती बिष्ट, यशोदा नेगी, चंदा, सीमा नेगी, रूप खत्री, सुशीला राणा, अंजू जुयाल, पूर्णिमा बलूनी, स्वाति नेगी, संजीव घिल्डियाल, समदर्शी बर्त्वाल, वीके डोभाल, मुकेश सेमवाल, कमलेश खंतवाल, वीरेंद्र असवाल, नत्था सिंह पवार, बलबीर सिंह, सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता और आंदोलनकारी मौजूद रहे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

 

अंकिता भंडारी हत्याकांड
बता दें कि पौड़ी जिले के यमकेश्वर प्रखंड के अंतर्गत गंगा भोगपुर स्थित वनन्तरा रिसोर्ट से 18 सितंबर 2022 की रात से संदिग्ध परिस्थितियों में रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी लापता हो गई थी। पुलिस ने जब जांच की तो पता चला कि हत्या कर उसका शव चीला नहर में फेंक दिया गया था। इस मामले में रिसोर्ट मालिक पुलकित आर्य, प्रबंधक सौरभ भास्कर और सहायक प्रबंधक अंकित गुप्ता को गिरफ्तार किया था। मुख्य आरोपी पुलकित आर्य पूर्व बीजेपी नेता और पूर्व मंत्री विनोद आर्य का बेटा है। पुलकित आर्य रिजॉर्ट का मालिक है। विनोद आर्य और उनके दूसरे बेटे अंकित आर्य को बीजेपी ने निष्कासित कर दिया था। इस मामले में चर्चा ये भी रही कि किसी वीआईपी को खुश करने के लिए अंकिता पर दबाव बनाया जा रहा था। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

इस मामले में राजनैतिक रूप से प्रभावशाली व्यक्तियों के शामिल होने और ढ़ंग से जाँच नहीं होने के कारण राष्ट्रीय स्तर पर प्रचार मिला। अंकिता की माँ के दावों से मामले को अधिक तूल मिला। पुलिस के आरोप में प्रभावशाली व्यक्तियों के शामिल होने के दावे को शामिल नहीं किया। आज तक वीआईपी के नाम का खुलासा नहीं हुआ। इस मामले के प्रमुख अभियुक्त पुलकित आर्य (रिज़ॉर्ट के मालिक), अंकित गुप्ता (रिज़ॉर्ट के सहायक प्रबंधक) और सौरभ भास्कर (रिज़ॉर्ट के प्रबन्धक) हत्या की बात कबूल कर ली। कोटद्वार कोर्ट में हुई सुनवाई में तीनों को उम्र कैद की सजा सुनाई गई है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

फिर नया खुलासा बीजेपी के पूर्व विधायक सुरेश राठौर की दूसरी पत्नी उर्मिला सनावर ने वीआईपी के नाम को लेकर किया। इसका वीडियो सोशल मीडिया में डाला गया। इसमें दावा किया गया कि वीआईपी बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री एवं प्रदेश प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम हैं। साथ ही राज्य में बीजेपी के एक पूर्व महामंत्री संगठन का नाम भी इस प्रकरण से जोड़ा गया है। ऐसे में नाम सामने आने के बाद इस हत्याकांड में सैकड़ों सवाल खड़े हो गए हैं। वहीं, बीजेपी के प्रदेश के महामंत्री संगठन अजय कुमाार का नाम भी इस हत्याकांड में काफी समय पहले ही आ चुका है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

इस खुलासे के बाद से ही हत्याकांड की हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में सीबीआई जांच कराने और वीआईपी सहित अन्य लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर विभिन्न संगठनों के साथ ही आम लोग सड़कों पर उतर गए थे। सीएम धामी ने इस मामले में सीबीआई जांच की संस्तुति केंद्र सरकार को भेजी है। ये संस्तुति एनजीओ चलाने वाले पर्यावरणविद् डॉ. अनिल जोशी की ओर से दर्ज एफआईआर के बाद की गई।
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Bhanu Bangwal

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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।