मोदी सरकार की मजदूर और किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ देहरादून में जेल भरो आंदोलन, जुलूस निकालने के बाद दी गिरफ्तारी
मोदी सरकार की मजदूर और किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ उत्तराखंड संयुक्त ट्रेड यूनियंस संघर्ष समिति व संयुक्त किसान मोर्चा के तत्वाधान में विभिन्न संगठनों ने देहरादून में जुलूस निकालकर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सांकेतिक गिरफ्तारियां दीं, बाद में सभी को रिहा कर दिया गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
सीटू , एटक, इंटक, उत्तराखंड किसान सभा से जुड़े कार्यकर्ता बड़ी संख्या में सोमवार को गांधीपार्क में एकत्र हुए। यहां से जिला मुख्यालय के लिए कूच किया। राजपुर रोड, घंटाघर, गांधी रोड , तहसील चौक से होते हुए जुलूस जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा। जहां कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में गिरफ्तारी दी। सीटू के जिला महामंत्री लेखराज ने बताया कि सिटी मजिस्ट्रेट ने जिला मुख्यालय पर ही गिरफ्तार आन्दोलनकारियों को बिना शर्त रिहा कर दिया। इस अवसर पर राष्ट्रपति को प्रेषित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इससे पूर्व देशव्यापी जेल भरो आंदोलन पर गांधी पार्क में हुई सभा में को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा चार श्रम साहिताएं लागू करने से मजदूरों का शोषण बढ़ गया है। इन श्रम सहिताओं के तहत मजदूरों के अधिकारो में व्यापक कटौती की गई है। इससे उनके श्रम की लूट बढ़ गई है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
की गई ये मांग
-श्रम संहिताओं और नियमों को वापस लिया जाए। औपचारिक और अनौपचारिक अर्थव्यवस्था के सभी श्रमिकों के लिए यूनियन बनाने, पंजीकरण, मान्यता, 8 घंटे का कार्य दिवस, कार्यस्थल सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा, हड़ताल का अधिकार, सामूहिक सौदेबाजी और निश्चित अवधि की नौकरी की समाप्ति सुनिश्चित की जाए।
-सभी फसलों पर C2+50% के आधार पर एमएसपी सुनिश्चित किया जाए तथा गारंटीकृत खरीद की जाए।
-बिजली संशोधन विधेयक 2025 को वापस लिया जाए। शांति अधिनियम (शांति एक्ट) वापस लिया जाए तथा बिजली के निजीकरण पर रोक लगाई जाए।
-सभी श्रमिकों, जिसमें ठेका श्रमिक और टुकड़ा दर (पीस रेट) पर काम करने वाले श्रमिक शामिल हैं, उनके लिए महंगाई भत्ता (डीए) से जुड़ी न्यूनतम मजदूरी 42,000 रुपये सुनिश्चित और लागू की जाए।
-बीवीजी ग्राम अधिनियम को समाप्त किया जाए तथा मनरेगा को पुनः बहाल किया जाए। 200 दिनों का काम और 700 रुपये दैनिक मजदूरी दी जाए।
-समर्पण और अधीनस्थ व्यापार समझौतों (सब-ऑर्डिनेटिंग ट्रेड डील्स) को रद्द किया जाए।
-किसानों और गरीब लोगों के लिए व्यापक ऋण माफी की जाए।
-लार (LARR) अधिनियम का सख्ती से प्रवर्तन किया जाए।
-उत्पादक सहकारी समितियों के अधीन कृषि का आधुनिकीकरण किया जाए तथा पीएसयू (PSUs) और सहकारी क्षेत्र के अंतर्गत कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा दिया जाए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
-पीएसयू और सार्वजनिक सेवाओं के निजीकरण/विनिवेश और बिक्री को रोका जाए। एनएमपी 2.0 पर रोक लगाई जाए। प्राकृतिक संसाधनों की लूट, आउटसोर्सिंग और ठेकीकरण बंद किया जाए।-ओपीएस (OPS) की बहाली, ईपीएस-95 में सुधार तथा सभी के लिए सार्वभौमिक पेंशन सुनिश्चित की जाए।
-स्वीकृत पदों पर भर्तियां की जाएं, रिक्त पदों की पूर्ति की जाए तथा नए पद/रोजगार/आजीविका के अवसर सृजित किए जाएं।
-सभी संविदा, दैनिक पारिश्रमिक, घरेलू आधारित टुकड़ा दर श्रमिकों, हॉकरों, फेरीवालों, स्वरोजगारियों तथा कचरा संग्राहकों आदि सहित सभी के लिए सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में पात्रता पर किसी भी प्रकार की सीमा (कैप) समाप्त की जाए।
-शिष्ट और गरिमापूर्ण कार्य सुनिश्चित किया जाए तथा आईएलओ कन्वेंशन 87, 98, 189, 190 के साथ-साथ हाल ही में आईएलओ के 114वें सत्र में गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए पारित कन्वेंशन को भी लागू किया जाए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
-एनएफएसए (NFSA) संशोधन अधिनियम को वापस लिया जाए, बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण किया जाए तथा सार्वभौमिक सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) सुनिश्चित की जाए।
-प्राथमिक से उच्च शिक्षा तक सरकारी शिक्षा का बजट बढ़ाया जाए, पेपर लीक जैसी परीक्षाओं में भ्रष्टाचार पर रोक लगाई जाए तथा एनईईटी (NEET) और सीबीएसई (CBSE) के हाल के मामलों की जवाबदेही तय की जाए।
-स्वास्थ्य को अधिकार बनाया जाए, ईएसआईसी (ESIC) का कवरेज बढ़ाया जाए तथा सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का बजट प्राथमिक/स्थानीय स्तर से लेकर जिला एवं नगर अस्पतालों तक बढ़ाया जाए।
-स्वच्छ पेयजल, स्वच्छता और आश्रय/आवास आदि के लिए सरकारी सेवाओं का प्रावधान किया जाए।
-एमएसएस (NSS) जैसे औपनिवेशिक कानून वापस लिए जाएं तथा बीएनएस (BNS) में ऐसे प्रावधान समाप्त किए जाएं।
-धन कर लगाया जाए तथा अति धनी लोगों पर आयकर की उच्च दरें लागू की जाएं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
710 लोगों ने दी गिरफ्तारी, प्रदर्शन में ये रहे शामिल
इस अवसर पर 710 प्रदर्शनकारियों ने गिरफ्तारीयां दीं। उन्हें सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा जिला मुख्यालय पर गिरफ्तार कर रिहाई का भी आदेश दिया गया। प्रदर्शनकारियों में सीटू के प्रांत के महामंत्री राजेंद्र सिंह नेगी, राज्य सचिव लेखराज, एटक के प्रांतीय महामंत्री अशोक शर्मा, उपाध्यक्ष अमर भंडारी व समर भंडारी, इंटक के जिला अध्यक्ष अनिल कुमार, प्रांतीय महामंत्री पंकज सिंह क्षेत्री, अखिल भारतीय किसान सभा के प्रांतीय अध्यक्ष शिव प्रसाद देवली, जिला महामंत्री पुरुषोत्तम बड़ौनी, सुरेंद्र सिंह सजवाण, अध्यक्ष दलजीत सिंह, महामंत्री पुरूषोत्तम बडोनी, राजेंद्र पुरोहित, सीटू के जिला अध्यक्ष एस.एस नेगी, आशा यूनियन की प्रांतीय अध्यक्ष शिवा दुबे, भोजन माता यूनियन की महामंत्री मोनिका, आंगनवाड़ी यूनियन से चित्रा, लक्ष्मी पंत, देवेश्वरी देवली, गोपाल वाल्मीकि, निर्माण श्रमिक यूनियन से मनीष कुमार, रेहड़ी पटरी यूनियन से धर्मेंद्र सोनकर, सोनू कुमार, दिगपाल, धन सिंह, सुरेंद्र सिंह, आनंद सिंह, राजेंद्र, उदय नेगी, गंभीर चौहान, कैलाश तोमर, जगत सिंह, बलबीर नेगी, सुनील कुमार, सोनू पाल, अंकित कुमार, मनोज कुमार, मुकेश कुमार, सुशील, भगवन्त पयाल, इन्दु नौडियाल, रविंद्र नौडियाल, बबीता अनन्त, इस्लाम, विप्लव अनन्त, सुधा देवली, अमर बहादुर शाही, याकूब अली, कृष्ण गुनियाल, रामसिंह भंडारी, इन्द्रेश नौटियाल, शम्भू प्रसाद ममगाईं, मनमोहन सिंह, एसएस रजवार, सुनीता चौहान, मंजू थापा, एसकेम के तेजेन्द्र, वरिष्ठ राज्य आन्दोलनकारी बालेश बबानिया, बस्ती बचाओ आन्दोलन के संयोजक अनन्त आकाश, अकरम, नरेंद्र सिंह आदि शामिल थे।
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