मुकुल रॉय ने भाजपा को दिया झटका, टीएमसी में शामिल होकर की घर वापसी
पश्चिम बंगाल में मुकुल रॉय बीजेपी को छोड़ टीएमसी में वापस लौट गए हैं। पिछले कई दिनों से चल रही अटकलों को विराम देते हुए शुक्रवार को उन्होंने घर वापसी कर ही ली।
पश्चिम बंगाल में मुकुल रॉय बीजेपी को छोड़ टीएमसी में वापस लौट गए हैं। पिछले कई दिनों से चल रही अटकलों को विराम देते हुए शुक्रवार को उन्होंने घर वापसी कर ही ली। आज दोपहर 3 बजे के करीब वो अपने घर से सीधे तृणमूल भवन पहुंचे जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहले से ही मौजूद थीं। पीछे से हाल ही में पार्टी के महासचिव बने अभिषेक बनर्जी भी पहुंच गए। वहां ममता बनर्जी और मुकुल रॉय की लंबी बातचीत हुई। तृणमूल कांग्रेस से जुड़ने के बाद रॉय ने कहा-मैं बीजेपी छोड़कर टीएमसी में आया हूं। अभी बंगाल में जो स्थिति है, उस स्थिति में कोई बीजेपी में नहीं रहेगा। तृणमूल कांग्रेस से बीजेपी में जाने वाले बंगाल के पहले नेता मुकुल रॉय बेटे शुभ्रांशु के साथ अपनी ‘पुरानी पार्टी’ के मुख्यालय पहुंचे थे।जानकारी के अनुसार, तृणमूल भवन पहुंचने के बाद रॉय सबसे पहले बिल्डिंग के अपने उस पुराने कमरे में गए जो उन्होंने 2017 में छोड़ा और फिर बीजेपी ज्वॉइन की थी। एक समय तृणमूल कांग्रेस में दूसरे नंबर की हैसियत रखने वाले रॉय नवम्बर 2017 में बीजेपी में शामिल हो गए थे। पिछले कुछ दिनों से उन्होंने बीजेपी से दूरी बना रखी थी। पत्रकारों ने घर से निकलते समय जब रॉय से पूछा कि वह कहां जा रहे हैं तो उन्होंने जवाब दिया-तृणमूल भवन।
पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की बीजेपी के खिलाफ धमाकेदार जीत के बाद से रॉय की ‘घर वापसी’ को लेकर पिछले कुछ समय से चर्चाएं जोरों पर थीं। इन चर्चाओं को उस समय और बल मिला जब ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी के प्रमुख नेता अभिषेक बनर्जी, मुकुल रॉय से मिलने उस अस्पताल पहुंचे थे। जहां रॉय की पत्नी भर्ती हैं। बताया जाता है कि इसके अगले ही दिन पीएम नरेंद्र मोदी ने मुकुल रॉय को फोन करके उनकी पत्नी के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली थी।
राय की चुप्पी और कोलकाता में बीजेपी की अहम बैठकों में उनकी गैरमौजूदगी से उनको लेकर आ रही रिपोर्ट के सही होने के बारे में मजबूत संकेत मिला था। एक समय ममता बनर्जी के बेहद करीबी माने जाने वाले मुकुल रॉय, वह पहले बड़े तृणमूल नेता थे जो बीजेपी में गए थे। बाद में तृणमूल कांग्रेस के कई विधायकों और नेताओं ने भी बीजेपी का दामन थामा था।





यह शुरुआत है बीजेपी के बुरे दिन शुरू.