Loksaakshya Social

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

June 21, 2026

दिलों में आज भी जिंदा हैं टिहरी की संस्कृति और परंपरा की यादेंः अभिनव थापर

पुरानी टिहरी के स्थापना दिवस 28 दिसम्बर के मौके पर मंगलवार को बल्लूपुर देहरादून में बने टिहरी के अनुकृति पर दीप प्रज्वलित कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जहां दीप जलाकर टिहरी के शहर को याद कर लोग भावुक हो गए। साथ ही इस दौरान आने वाली पीढ़ियों को टिहरी और उसकी संस्कृति याद रहे इसके लिए कामना की। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

सामाजिक कार्यकर्ता अभिनव थापर और सुबोध बहुगुणा ने साथ मिलकर स्थानीय लोगों के साथ टिहरी के लैंड स्कैप पर हुबहु बनाए गए घंटाघर, राजा का दरबार, आजाद मैदान, बस अड्डा, गंगा जी, भगीरथी नदी का का मार्ग, टिहरी बाजार की प्रतिकृति पर दीप प्रज्ज्वलित किए। उन्होंने कहा कि टिहरी ऐतिहासिक संस्कृति, परंपरा और सभ्यता से राजशाही के समय से गढ़वाल क्षेत्र में अपनी अलग पहचान रखता था। टिहरी आज भले ही झील के पानी में समा गया हो और तस्वीरों और इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह गई हो, लेकिन उसी संस्कृति और परंपरा को संजोय रखने के लिए हम टिहरी का स्थापना दिवस मना रहे हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उन्होंने कहा कि पुरानी टिहरी का गौरवमय इतिहास रहा है और यहां के लोगों ने देश के विकास के लिए अपनी जन्मभूमि देकर बहुत बड़ा योगदान दिया। टिहरी शहर हमेशा हर एक उत्तराखंडी की स्मृतियों में जिंदा रहेगा। इस मौके पर अविरल, शशांक, सुकान्त, शिवा, सुषमा गार्ग्य , कांता आदि मौजूद रहे।

Bhanu Prakash

लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं।
भानु बंगवाल
मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।