ललित मोहन गहतोड़ी का होली गीत, घूंघट बीच दो…
घूंघट बीच दो नैना चलकी
अंगिया पटकी सलुआ झलकी
काली गोरी बाकि छोरी।। 2।।
नैना मारे झप झप की
घूंघट बीच दो…
रंग अबीर गुलाल लगाए।। 2।।
शोभा न्यारी मुख मुख की
घूंघट बीच दो… (जारी, अगले पैरे में देखिए)
होली खेलन बाहर निकली।। 2।।
बाकि छोरी घर घर की
घूंघट बीच दो…
चार दिनन की वर्ष में होली।। 2।।
याद सजाले पल पल की
घूंघट बीच दो…
आओ गोरी खेल ले होरी।। 2।।
घूंघट खोल दिखा झल की
घूंघट बीच दो…
रचनाकार का परिचय
रचनाकार ललित मोहन गहतोड़ी काली कुमाऊं चंपावत से प्रकाशित होने वाली वार्षिक सांस्कृतिक पुस्तक फुहारें के संपादक हैं। वह जगदंबा कालोनी, चांदमारी लोहाघाट जिला चंपावत, उत्तराखंड निवासी हैं।
नोटः सच का साथ देने में हमारा साथी बनिए। यदि आप लोकसाक्ष्य की खबरों को नियमित रूप से पढ़ना चाहते हैं तो नीचे दिए गए आप्शन से हमारे फेसबुक पेज या व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ सकते हैं, बस आपको एक क्लिक करना है। यदि खबर अच्छी लगे तो आप फेसबुक या व्हाट्सएप में शेयर भी कर सकते हो।

Bhanu Bangwal
लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं।
मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।


