कौथिग 2022 में उतराखंड के सुप्रसिद्ध लोकगायकों ने दी गीतों की शानदार प्रस्तुति
देहरादून के रेसकोर्स स्थित मैदान में गढ़वाल सभा देहरादून की ओर से आयोजित किए जा रहे कौथिग-2022 के तीसरे दिन आज उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध लोकगायकों ने शानदार प्रस्तुति दी। इस मौके पर श्रोता लोक कलाकारों की प्रस्तुति को सुनकर झूम उठे। ये आयोजन दस दिवसीय है। कौथिग गीत संध्या कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि ग्राफिक एरा के चेयरमैन कमल घनशाला के प्रतिनिधि कुलपति संजय जसोला जी की ओर से किए गे दीप प्रज्ज्वलन के साथ की गई। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)कार्यक्रम की शुरुआत जागर सम्राट पद्मश्री प्रीतम भरतवाण ने राजराजेश्वरी मा का जागर, अपना नया गीत सुरमा तेरी खतयूं पाजेब बजदी की प्रस्तुति दी। स्वर कोकिला मीणा राणा ने अपना प्रसिद्ध गीत ओ साहिबा, और ह्यून्द का दिन फिर बॉडी ऐगीना सुनाया। गीतों की इस श्रृंखला में कुमाऊं से आये गायक कैलाश कुमार ने- पहाड़ो को था को ठंडा पानी..सुनाया। इसके बाद गढ़वाल सभा के स्टेज से ही निकले उभरते हुए कलाकार करन रॉवत ने डांडी काँठी तवे तैं बुलोन्दू…गीत की प्रस्तुति दी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
दर्शन फर्स्वाण ने हे नंदा है गौरा, झुमकयाली झुमकयाली सुनाया। लोकगायक अनिल बिष्ट ने अपना सुप्रसिद्ध गीत- ऐजा है भानुमति पाबो बाजरा सुना कर माहौल को झूमा दिया। साथ ही उन्होंने चैतवाली गीत भी सुनाया। रेशम शाह ने धनै बॉघ महासू देवता और फुर्ती गीत की प्रस्तुति दी। इसके बाद पुनः प्रीतम भरतवाण ने दर्शकों की फरमाइश पर मोहन तेरी मुरली बाजे, सरूली मेरो जिया लगी गई, जैसे गीत सुना कर दर्शकों को नाचने पर मजबूर कर दिया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इससे पहले गढ़वाल सभा के अध्यक्ष रोशन धस्माना, पंडित उदय शंकर भट्ट, महासचिव गजेंद्र भंडारी ने सभी कलाकारों को माल्यार्पण और टोपी पहना कर उनका स्वगत किया। अध्यक्ष रोशन धस्माना ने कहा कि कलाकारों का स्नेह ही सभा की ताकत है। संचालन प्रवक्ता अजय जोशी ने किया। इस अवसर पर निर्मला बिष्ट, सूर्य प्रकाश भट्ट, वीरेंद्र असवाल, उडवीर पंवार आदि उपस्थित थे।



