कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने प्रदेश सरकार से पूछा सवाल, 2017 में औद्योगिक विकास की आईडीएस स्कीम का क्या हुआ
उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकार वार्ता कर देहरादून में गतिमान इन्वेस्टर समिट के लिए राज्य सरकार को शुभकामनाएं दी। साथ ही प्रदेश सरकार से कई सवाल पूछे। माहरा ने कहा कि 2017 में भारत सरकार की ओर से हिमालयी राज्यों हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर में औद्योगिक विकास के लिए आईडीएस स्कीम लॉन्च की गई थी। इस इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट स्कीम का क्या हुआ। इसका भी प्रदेश सरकार को जनता को बताना चाहिए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा कि इस स्कीम के तहत उपरोक्त राज्यों में निवेश करने वाले उद्योगों को भारत सरकार की और से 30 प्रतिशत सब्सिडी देने की बात कही थी। माहरा ने कहा कि ये र्दुभाग्य ही कहा जा सकता है कि इतनी लाभकारी स्कीम ने चार वर्षो में ही दम तोड़ दिया और 2021 में समाप्त कर दी गयी। वहीं, इस योजना का वादा पांच वर्षो यानी 2022 तक के लिए था। इस स्कीम के तहत उत्तराखण्ड को जो राशि तय की गई थी, उसमें से मात्र 1100 करोड़ ही अतिथि तक प्राप्त हो पाया है। उद्योगों को मिलने वाली सब्सिडी का पांच हजार करोड़ भारत सरकार पर अभी भी बकाया है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
माहरा ने कहा कि उक्त योजना को देखने से लगता है कि जहां एक और भारत सरकार का निवेशकों के साथ छल उजागर होता है, वहीं दूसरी और उत्तराखण्ड की उद्योग नीति पर भी बड़ा प्रश्न चिह्न लगाता है। माहरा ने राज्य सरकार को याद दिलाते हुए कहा कि कुछ समय पहले त्रिवेन्द्र सरकार ने जिस तर्ज पर 2019 के लोकसभा चुनावों को प्रभावित करने के लिए इन्वेस्टर समिट किया था, जिसका नतीजा शून्य ही निकला। 2023 का इन्वेस्टर समिट भी उसी का रैप्लिका दिखाई पड़ता है। 2018 में हुए इन्वेस्टर समिट के लिए भी रातों रात सड़कों के किनारे खजूर के पेड़ लगा दिए गए थे, उसी तरह इस बार उत्तराखण्ड की सड़कों पर गेंदा उगा दिया गया है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
माहरा ने कहा कि राज्य सरकार में इन्वेस्टर समिट के मध्यनजर 38 करोड़ से वॉल पेन्टिग, 22 करोड़ से लैंड स्केपिंग और 18 करोड़ की लागत से दुकानों पर भगवा बोर्ड लगाने पर खर्च कर दिए हैं। माहरा ने आशंका जताई कि जितना पैसा पानी की तरह इस समिट के लिए बहाया जा रहा है, उसकी भरपाई किस तरह से हो पायेगी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
माहरा ने कहा कि पिछली प्रेस वार्ता में उन्होंने इन्वेस्टर समिट को लेकर राज्य सरकार से कई सवाल किए, लेकिन बीजेपी प्रवक्ताओं और नेताओं ने उस पर चुप्पी साध ली है। उन्होंने कहा कि सरकार से सवाल पूछा था कि मैकेन्जी ग्रुप जो एक ब्लैक लिस्टेड कम्पनी है, उसे 2 लाख 50 हजार रुपये प्रतिदिन किस मद से दिये जा रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा दिसंबर 2022 में एक अमेरिकन कम्पनी मैकेन्जी ग्रुप के साथ इस तहत अनुबन्ध किया गया था कि वह राज्य की जीडीपी में बड़ा सुधार करेगी। राज्य सरकार को कर्ज मुक्त करने की तरफ कदम बढ़ाएगी। माहरा ने पूछा कि सालाना 80 करोड़ रूपये देकर जो कम्पनी हायर की गयी, आज लगभग एक साल बीत जाने के बाद राज्य उससे कितना लाभान्वित हुआ। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा कि इसी तरह सवाल पूछा था कि पंडित नारायण दत्त तिवारी जी के शासन में बिना इन्वेस्टर्स मीट के प्रदेशभर में सिडकुल के तहत देहरादून के सेलाकुई, हरिद्वार के रोशनाबाद, पथरी, भगवानपुर, उधमसिंह नगर के रुद्रपुर, सितारगंज आदि क्षेत्रों में छोटे-बडे 2000 उद्योग स्थापित किये गये। सरकार बताये कि उनमें से कितने अब तक पलायन कर गये? (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
तीसरा सवाल ये था कि पंडित नारायण दत्त तिवारी जी के शासन में स्थानीय बेरोजगारों के लिए स्थापित उद्योगों में 70 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की गई थी जिसे भाजपा सरकार ने समाप्त कर दिया है। इसके विपरीत एम्स जैसे संस्थानों में दूसरे प्रदेशों के लोगों को रोजगार देकर स्थानीय बेरोजगारों के हक पर डाका क्यों डाला जा रहा है? (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
चौथा सवाल है कि भाजपा सरकार द्वारा 2018 में कराये गये इन्वेस्टर्स सम्मिट में 125 हजार करोड़ के इन्वेस्ट का दावा किया गया था। उनमें से कितने धरातल पर उतर पाये? राज्य सरकार ने जनता की गाढ़ी कमाई से 7 लाख को रोजगार देने के बडे-बडे होर्डिंग बोर्ड लगाए थे, कितने बेरोजगारों को रोजगार मिला? (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा कि जो उद्योग पूर्व से स्थापित हैं तथा उनके कार्यालय दिल्ली, मुंबई, गाजियाबाद, नोएडा, गुड़गांव में हैं, उनसे एमओयू लंदन में क्यों हो रहे हैं? इसी तरह 24 घंटे बिजली आपूर्ति का दावा करने तथा विद्युत उत्पादक राज्य होने के बावजूद ऊर्जा प्रदेश में बिजली की आपूर्ति लगातार बाधित हो रही है और विद्युत किमते भी कई राज्यों से अधिक हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा कि आपदा प्रबन्धन विभाग के सरकारी आंकडों के अनुसार राज्य में इसी वर्ष बरसात के मौसम में राज्य की 400 से ज्यादा सड़के तीन महीने से भी अधिक समय तक बाधित रही, ऐसे में पर्वतीय अंचलों में निवेश कैसे पहुंचेगा? (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
कांग्रेस की सरकारों में किसी भी बाहरी उद्योग घरआने से अनुबन्ध के समय यह करार होता था कि जिस भी प्रयोजन से भूमि आवंटित कराई जाएगी। वह उसी के तहत इस्तेमाल की जाएगी वरना भूमि राज्य सरकार में निहित हो जाएगी। परन्तु भाजपा की सरकार ने आत्मघाती निर्णय लेते हुए उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए इस नियम को दरकिनार कर दिया और यह प्रावधान समाप्त कर दिया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
पत्रकार वार्ता में कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष संगठन एवं प्रशासन मथुरा दत्त जोशी, मुख्य प्रवक्ता गरिमा माहरा दसौनी, मीडिया सलाहकार अमरजीत सिंह, प्रदेश प्रवक्ता राजेश चमोली, शीशपाल सिंह बिष्ट, मोहन काला उपस्थित रहे।
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