कोरोना की बूस्टर डोज और बच्चों की वैक्सीन को जल्द सार्वजनिक होगी व्यापक नीति, अगले माह आएगी बच्चों की वैक्सीन
कोरोना के नए वैरिएंट ओमीक्रोन के खतरे के बीच कोविड-19 टास्क फोर्स के अध्यक्ष डा. एनके अरोड़ा ने बताया कि टीकाकरण अभियान पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह की ओर से अगले दो हफ्ते में अतिरिक्त और बूस्टर डोज के संबंध में एक व्यापक नीति सार्वजनिक की जाएगी।
कोरोना के नए वैरिएंट ओमीक्रोन के खतरे के बीच कोविड-19 टास्क फोर्स के अध्यक्ष डा. एनके अरोड़ा ने बताया कि टीकाकरण अभियान पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह की ओर से अगले दो हफ्ते में अतिरिक्त और बूस्टर डोज के संबंध में एक व्यापक नीति सार्वजनिक की जाएगी। यही नहीं 18 साल से कम उम्र के 44 करोड़ बच्चों के टीकाकरण की व्यापक योजना भी जल्द ही सार्वजनिक की जाएगी।उन्होंने बताया कि अधिक जोखिम वाले बच्चों के लिए टीकाकरण दिसंबर में शुरू होगा और उसके बाद आने वाले साल की पहली तिमाही में स्वस्थ बच्चों के लिए वैक्सीनेशन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि Zydus-Cadilla की ZyCoV-D वैक्सीन की खुराक की संख्या को तीन से दो खुराक तक करने के भी प्रयास किए जा रहे हैं। वयस्कों में टीकाकरण की तरह ही देश के 44 करोड़ बच्चों के लिए भी प्राथमिकता प्रक्रिया लागू है और जोखिम वाले बच्चों की एक सूची तैयार की जा रही है।
डॉ अरोड़ा ने कहा कि हम चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेंगे, लेकिन आखिरकार, मुझे लगता है कि दिसंबर के अंत तक हम जोखिम वाले बच्चों के लिए बाल चिकित्सा टीकाकरण शुरू करने में सक्षम होंगे। जैसे ही हम इसे पूरा करते हैं, जो कि 10 से 15 प्रतिशत के आसपास है, हम स्वस्थ बच्चों के वैक्सीनेशन का काम शुरू करेंगे। उन्होंने कहा कि वे ZyCov-D की खुराक का परीक्षण के परिणामों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। Covaxin ने भी परीक्षण समाप्त कर लिया है और हम दिसंबर के अंत तक हम Covovax (सेरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से) का भी बाल चिकित्सा परीक्षण के समाप्त करने की उम्मीद कर रहे हैं।
स्कूल के मुद्दे पर डॉ अरोड़ा ने कहा कि मैं पूरे देश से अनुरोध करता हूं कि राज्य सरकारें और निजी सेक्टर के स्कूल हैं उन्हें खोल देना चाहिए। उन्होंने कहा कि माता-पिता को अपने बच्चों को स्कूल भेजना चाहिए, क्योंकि हमारे पास प्रतिरक्षित वयस्कों का एक अच्छा समूह है और विशेष प्रयास किए गए हैं कि सभी स्कूलों और कर्मचारियों को वैक्सीनेट किया जाए। माता-पिता को यह देखना चाहिए कि जिनके बच्चे स्कूल जा रहे हैं, उनके घर में सभी वयस्कों का टीकाकरण हुआ हो, ताकि बच्चों को सुरक्षा के घेरे में रखा जा सके। इसके अलावा, अधिकांश बच्चे पहले से ही संक्रमित हैं। इसलिए वह एक तरह से फिलहाल सुरक्षित भी हैं।



