मत देखो नफरत भरी निगाहों से मत देखो इंसान मुझे, नफरत भरी निगाहों से। मेरा भी इस गांव से नाता,...
साहित्य जगत
अचकल्यूं (भाग-2) कबी- कबी ता इनु लगद, जीवन ह्वे आसान. सैरू कुटम दगणै चा, हम छवां- बड़ भग्यान.. जमा पूंजिम...
जय -जय मारुति नन्दन हे प्रभु तुम्हीं दया निधान हो सकल गुणों की तुम खान हो तेज तपस्वी महावीर तुम...
गांव जब मजे में थे तो गांव सब भूल गये। मुसीबत में आज गांव याद आ गये।। शहर-शहर, गली-गली सब...
आवाजी : शिवजी का वाद्य यन्त्र है - ढोल ! ऐ मधुर झंकार ! सहस्त्र सुर लय ताल, दिव्य- मनोहर...
प्रभु तेरा हम पर एहसान होगा समय लगेगा जरूर यहां पर, प्रभु का हम पर एहसान होगा। बुरे दौर से...
अचकल्यूं अचकल्यूं कनु-अणजांण सी, जीवन ह्वेगे. लतोण्यूं- पतोण्यूं बेजांण सी, जीवन ह्वेगे.. करणी-धरणी कुछ नि रैगे, मौज हुण लगीं, खालि-...
जग तारिणी दुख हारिणी माँ गंगा गौमुख से मां गंगा निकलती है पर्वतो से अठखेलियाँ करती, मधुर मंगल गीत गाती...
कवि एवं साहित्यकार सोमवारी लाल सकलानी, निशांत सेवानिवृत शिक्षक हैं। वह नगर पालिका परिषद चंबा के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर हैं।...
आज खोल दो अमर द्वार आज खोल दो अमर द्वार, जहां खो गई तुम्हारी निश्छल जवानी। अब तो आ जाओ...
