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July 19, 2026

बिजली के बिलों को लेकर बीजेपी का दोहरा चरित्र, जनता करेगी लोकसभा चुनाव में हिसाबः लालचंद शर्मा

देहरादून महानगर कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष लालचंद शर्मा ने उत्तराखंड में बार बार बिजली की दरों में वृद्धि को लेकर प्रदेश की बीजेपी सरकार पर सियासी हमला बोला है। उन्होंने कहा कि बिजली के बिलों को लेकर बीजेपी का दोहरा चरित्र है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हाल ही मे सम्पन्न हुए विधानसभा चुनाव में राजस्थान में पहुंचकर बिजली के बिल मॉफ करने की बात करते हैं, वहीं, उत्तराखंड में बिजली का बिल लोगों के पसीने निकाल रहा है। उत्तराखंड में बिजली उत्पादन होने के बावजूद बिजली के दामों में लगातार बढ़ोतरी की जा रही है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

देहरादून महानगर कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष लालचन्द शर्मा ने कहा कि एक बार फिर से राज्य में बिजली के दामों में बढोतरी का प्रस्ताव है। देश एवं प्रदेश में महंगाई हर क्षेत्र में अपने चरम पर है। आम जरूरत की चीजों के दाम आसमान छू रही हैं। गरीब आदमी दो जून की रोटी के लिए संघर्ष कर रहा है। वहीं राज्य सरकार की ओर से बिजली के दामों में भारी वृद्धि करने का निर्णय लिया है। इससे महंगाई के बोझ से दबती जनता की परेशानी दोगुनी हो जाएगी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

लालचन्द शर्मा ने कहा कि एक ओर जहां कई राज्य सरकारों की ओर से अपने राज्य की जनता को सौ से लेकर दो सौ यूनिट बिजली मुफ्त दी जा रही है। हाल ही में संपन्न हुए चुनावों के दौरान बीजेपी के नेता चुनावी राज्यों में बिजली के बिलों में छूट की बात करते रहे। वहीं, उत्तराखंड में बिजली उत्पादन होने के बावजूद बिजली के दामों में लगातार बढ़ोतरी की जा रही है। यही भारतीय जनता पार्टी के दोहरे चरित्र को उजागर करता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उन्होंने कहा कि राज्य की भाजपा की केन्द्र सरकार लोगों की पीड़ा को दर किनार करते हुए प्रत्येक क्षेत्र में मंहगाई बढ़ाने का काम कर रही है। राज्य सरकार बिजली के दाम कम करने की बजाय दाम बढ़ा कर लोगों के घावों पर नमक छिडकने का काम कर रही है। उत्तराखंड राज्य विद्युत उत्पादक राज्य के रूप में जाना जाता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उन्होंने कहा कि यहां पर टिहरी बांध, कोटेश्वर, मनेरी-भाली सहित उत्तराखंड में वर्तमान में 25 जल-विद्युत परियोजना (6 मध्यम एवं 19 लघु) 2378 मेगावाट क्षमता के साथ निर्माण चरण में हैं। साथ ही 21,213 मेगावाट क्षमता वाली 197 जल-विद्युत परियोजनाएं उत्तराखंड के विभिन्न नदी घाटियों में प्रस्तावित हैं। ऐसे में जल विद्युत परियोजनाओं से राज्यवासियों को लाभ के रूप में घरेलू उपभोग के लिए मात्र 1 रूपये 50 पैसे प्रति यूनिट पर बिजली दी दी जानी चाहिए, जो कि यहां के निवासियों का अधिकार भी है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के किसानों को खेती के लिए मुफ्त बिजली दी जानी चाहिए। क्योंकि विद्युत परियोजनाओं की लाईनों के लिए यहां के किसानों की भूमि अधिग्रहित गई है, जिसका कोई मुआवजा भी किसानों को नहीं दिया जाता है। उन्होने कहा कि सरकार विद्युत उपभोक्ताओं से पहले ही मीटर चार्ज के रूप में कई वर्षों तक किराया वसूल करती है, जबकि विद्युत मीटर की कीमत मात्र कुछ ही समय में पूरी हो जाती है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

साथ ही जमानत के रूप में कनेक्शन लेते समय मोटी रकम वसूली जाती है। जो वर्षों तक सरकारी खजाने में जमा रहती है। इसके बावजूद लगातार बिजली के दाम बढ़ाये जाते हैं। उन्होंने मांग करते हुए कहा कि राज्य सरकार विद्युत दरों को बढ़ाने के प्रस्ताव को शीघ्र वापस लेने, राज्य के किसानों को मुफ्त बिजली देने के साथ ही विद्युत सरचार्ज व मीटर किराया समाप्त किया जाए। उन्होंने कहा कि बीजेपी के दोहरे चरित्र को अब जनता समझ चुकी है। आगामी लोकसभा चुनाव में जनता ही अब बीजेपी का हिसाब कर देगी।
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