जहां गुरुद्वारा, मंदिर और राष्ट्रपति आशिया, वहां खोल दी शराब की दुकान, महिलाओं ने किया प्रदर्शन
ये भी दुर्भाग्य है कि जिन महिलाओं को नारी शक्ति वंदन के नाम पर बीजेपी की केंद्र और राज्य सरकारें इन दिनों एकजुट करने का प्रयास कर रही है। वहीं, दूसरी तरफ उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में महिलाएं दूसरे कारण से सरकार से नाराज हैं। हालांकि, ऐसी महिलाओं में ज्यादा वे भी हो सकती हैं, जो बीजेपी की कट्टर समर्थक हों। फिर भी उन्होंने नारे लगाने में सतर्कता बरती और जिला प्रशासन या फिर सरकार के खिलाफ नारे नहीं लगाए। सिर्फ नारे ये लगे-जो हमसे टकराएगा, चूर चूर हो जाएगा, तानाशाही नहीं चलेगी, आवाज दो-हम एक हैं, शराब का ठेका बंद करो, नारी शक्ति जिंदाबाद, तानाशाही नहीं चलेगी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
अब हम मूल कहानी में आते हैं। उत्तराखंड में पिछले कुछ साल से चाहे विकास हुआ हो या ना हुआ हो। दूर दराज की गांवों से बीमार को अस्पताल लाने की सुविधा में सुधार आया हो या ना आया हो, पेयजल सप्लाई को नियमित करने के प्रयास भले ही परवान नहीं चढ़ पाए हों। इससे ज्यादा सरकार ने शराब के ठेके गली, मोहल्लों और सड़कों पर खोलने पर जरूर दिलचस्पी दिखाई है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
देहरादून की राजपुर रोड पर आरटीओ के निकट शराब की दुकान पिछले कई साल से संचालित हो रही है। सरकार ने इसी दुकान की एक्सटेंशन शॉप दूसरे स्थान पर खोलने की अनुमति दी और कैनाल रोड जाखन क्षेत्र में पिछले कुछ साल से शराब की दुकान संचालित की जाने लगी। इस दुकान के निकट ही बाला सुंदरी माता का मंदिर भी थी। हालांकि, सड़क के एक तरफ दुकान थी और दूसरी तरफ शराब की दुकान। अब अप्रैल माह से नई निविदा के कारण ठेकेदार बदल गया और उसने दूसरे स्थान पर शराब की दुकान खोल दी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
ये दुकान राष्ट्रपति निकेतन के गेट नंबर चार के सामने ही द लिकर फोर्ट के नाम से खोली गई। आवासीय क्षेत्र वैली एनक्लेव कैनाल रोड पर खोली गई इस दुकान के निकट ही गुरुद्वारा है। वहीं, करीब तीन सौ मीटर की दूरी पर बाला सुंदरी मंदिर भी है। दुकान से सटी कई कालोनियां हैं। ऐसे में महिलाओं का गुस्सा फूटना भी जरूरी है। पहुंच गईं शराब की दुकान के आगे और शुरू कर दी नारेबाजी। हालांकि, शराब के ठेकेदारों की पहुंच इतने ऊपर तक होती है कि एक दो छोटे मोटे प्रदर्शन से उनका बाल भी बांका नहीं होता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए प्रदर्शन की वीडियो)
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मानवता की सारी हद पार कर केवल अपने मुनाफे के लिए धार्मिक स्थानों का भी ध्यान नहीं रखा जा रहा है। अगर शीघ्र ही इस ठेके को बंद नहीं किया गया तो क्षेत्रवासियों का गुस्सा फूट सकता है और कोई भी घटना घट सकती है। महिलाओं ने जिला प्रशासन, सरकार से मांग की है कि इस समस्या का शीघ्र निराकरण किया जाए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
प्रदर्शन करने वालों में पूर्व पार्षद कमल थापा, राजलक्ष्मी काला, रश्मि धामी, चंद्रकला नेगी, गजेंद्र रौतेला, हर्ष धामी, अजीत सिंह, राजेंद्र रौथन, ममता, सुम्मी गोदियाल, बीना रौतेला, पीएम गौतम, एम के गुप्ता, संपत्ति गोसाईं, अंजना भगत, परमेश्वरी सेमवाल, रेनू नवानी, मनीष जेटली, परमिंदर ओबेरॉय आदि शामिल थे।
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