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July 10, 2026

अशोक आनन की कविता- पराजय

उनसे
पराजय सही न जाए।
हार का ठीकरा
औरों पर।
डूब का माजरा
छोरों पर।
उनसे
सच बात कही न जाए ।
चिंतन
कभी वे करते नहीं।
मंथन को
हाथ बढ़ते नहीं। (कविता जारी, अगले पैरे में देखिए)

दीवार
कोई ढही न जाए ।
हार की
पहले वज़ह जानिए।
हुई जो
ग़लती उसे मानिए।
अहं की
खोली बही न जाए ।
सत्ता तो
आनी – जानी है।
यही बात
तो समझानी है।
पृथ्वी का
हुआ मही न जाए।
कवि का परिचय
अशोक आनन
जूना बाज़ार, मक्सी जिला शाजापुर मध्य प्रदेश।
Email : ashokananmaksi@gmail.com

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