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July 11, 2026

इन्वेस्टर्स मीट केवल चुनावी शिगूफा, पूर्व सीएम त्रिवेंद्र के कार्यकाल में दो लाख करोड़ के एमओयू कहां हुए लापताः धस्माना

उत्तराखंड में आगामी दिसंबर माह में होने वाली बहुप्रचारित इन्वेस्टर्स मीट को प्रदेश कांग्रेस ने केवल भाजपा का चुनावी शिगूफा करार दिया। साथ ही आरोप लगाया कि पिछले सात वर्षों में राज्य की बेरोजगारी दर को चरम पर पहुंचाने वाली भाजपा राज्य की जनता और विशेषकर बेरोजगार नौजवानों को इन्वेस्टर्स मीट के नाम पर भरमाने का काम कर रही है। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि पिछले सीएम के कार्यकाल में भी इनवेस्टर समिट के आयोजन किए गए थे। तब भी बड़े बड़े करार हुए। आखिर वो एनओयू कहां गए, क्या इसका खुलासा भी सरकार करेगी। पहले के करार से कितने उद्योग लगे। कितने युवाओं को रोजगार मिला। क्या इसे भी राज्य की जनता को बताने में सरकार को कोई दिक्कत है। या फिर सारे दावे हवा हवाई हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

कांग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि इस बार का आयोजन भी वैसा ही है, जैसा 2018 में लोकसभा चुनावों से पहले तत्कालीन भाजपाई मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने किया था। आज अपने कैम्प कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए धस्माना ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी व भाजपा से सवाल किया कि राज्य की जनता उनके ढाई लाख करोड़ रुपए निवेश लाने के दावे पर कैसे भरोसा कर ले। क्योंकि, इसी प्रकार से 2018 में तत्कालीन भाजपाई मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इन्वेस्टर्स मीट करवा कर तब दो लाख करोड़ रुपए के एमओयू होने का दावा किया था। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उन्होंने कहा कि आज पांच साल बाद भाजपा सरकार का कोई भी अधिकृत व्यक्ति मुख्यमंत्री से लेकर मुख्यसचिव तक यह बताने की स्थिति में नहीं है कि 2 लाख करोड़ न सही, तब के एमओयू से दो हज़ार करोड़ रुपये का भी निवेश क्या प्रदेश में आया हो। धस्माना ने कहा कि अब 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले फिर एक बार इन्वेस्टर्स समिट का राग और मुख्यमंत्री मंत्रियों व अधिकारियों के देश विदेश के दौरे व दावे शुरू हो गए हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं व सरकार ने माहौल बनाना शुरू कर दिया है, लेकिन इस बार जनता को विश्वास तभी होगा जब मुख्यमंत्री जी स्वयं आगे आ कर यह बताएंगे कि उनके पूर्वर्ती मुख्यमंत्री जी के द्वारा किये गए एमओयू का क्या हुआ। फिलहाल बीजेपी किसी भी आयोजन के लिए ढोल पीटती है। बाद में क्या हुआ, इसका पता किसी को नहीं चलता है। इस बार भी ऐसा ही हो रहा है।
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