दून के मास्टर प्लान में आवासीय क्षेत्रों में भूउपयोग व्यावसायिक करने का कांग्रेस ने किया विरोध, सैटलाइट सिटी की मांग
राजधानी देहरादून के लिए एमडीडीए की ओर से प्रस्तावित देहरादून मास्टर प्लान 2041 के संबंध में आज प्रदेश कांग्रेस कमेटी का एक प्रतिनिधिमंडल एआईसीसी के सदस्य व प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना के नेतृत्व में एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी से उनके कार्यालय में मिला। उन्होंने प्रस्तावित मास्टर प्लान के संबंध में सुझावों व आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तिथि 30 अप्रैल से दो माह आगे बढ़ाने की मांग की। साथ ही प्राधिकरण के वीसी से अन्य विषयों पर चर्चा की। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
धस्माना ने उपाध्यक्ष से कहा कि एमडीडीए के बारे में देहरादून के जन मानस में अच्छी छवि नही है। क्योंकि अपने अस्तित्व में आने से लेकर अब तक प्राधिकरण ने देहरादून के नियोजित विकास में जो भूमिका निभानी चाहिए थी, वह नहीं निभाई। इसीलिए अब नए प्रस्तावित मास्टर प्लान 2041 के बारे में जनता के मन में बहुत सारी आशंकाएं हैं। धस्माना ने कहा कि आपके कार्यालय द्वारा दिनांक एक अप्रैल 2023 को जारी एक विज्ञापन विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित हुआ। इस विज्ञापन के माध्यम से आपने जनता से अपेक्षा की है कि एमडीडीए के प्रस्तावित देहरादून मास्टर प्लान 2041 के संबंध में सुझाव व आपत्तियां प्रस्तुत करें। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इस प्रस्तावित देहरादून मास्टर प्लान के संबंध में सबसे पहली बात तो हम यह कहना चाहते हैं कि देहरादून में एमडीडीए के अस्तित्व में आने के बाद इस प्राधिकरण के गठन के मुख्य उद्देश्य पर कभी काम हुआ ही नहीं। व्यवस्थित शहर के रूप में देहरादून के विकास के लिए कभी भी मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण ने काम नहीं किया। अपने गठन से लेकर अब तक लगभग चार दशकों में देहरादून के विकास में एमडीडीए की भूमिका मुख्यतः एक नक्शे (आवासीय अथवा व्यावसायिक) पर मोहर लगा कर फीस वसूलने वाली एजेंसी के रूप में रही। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा कि दूसरा प्राधिकरण की अदूरदर्शिता व खराब योजनाओं के चलते देहरादून का बेतरतीब विकास आज देहरादून के खस्ताहाल होने का बड़ा कारण है। मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण के सभी योजनाएं चाहे वो ट्रांसपोर्ट नगर का निर्माण रहा हो या आईएसबीटी का निर्माण, घंटाघर का काम्प्लेक्स रहा हो या इंदिरापुरम,कांवली रोड, केदारपुरम आदि, इनमें आवासीय कालोनियों का निर्माण ये सब एमडीडीए के फ्लॉप प्रोजेक्ट्स के जीते जागते उदाहरण हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
धस्माना ने कहा कि शहर के नियोजित विकास की जगह एमडीडीए ने अधिकांश रिहाईशी इलाकों में व्यावसायिक व शैक्षणिक संस्थाओं को खुली छूट दे कर देहरादून में ट्रैफिक व ड्रेनेज जैसी समस्याओं को विकराल करने में अपना योगदान दिया है। चालीस वर्षों में महनागर देहरादून के लिए एक ड्रेनेज प्लान तैयार करना तो दूर की कौड़ी है, जो प्राकृतिक ड्रेनेज ईस्ट व वेस्ट कनालों (नहरों) से होता था, उसको भी सड़क चौड़ीकरण के नाम पर खत्म करने का काम देहरादून में हुआ। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा कि रिस्पना व बिंदाल नदियां तो पहले ही सिंचाई विभाग, राजस्व विभाग, एमडीडीए, नगर निगम व जिला तथा पुलिस प्रशाशन की नाक के नीचे नदियों से नाले और अब नाली बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि राज्य बनने के बाद सोने में सुहागा हो गया और रही सही कसर राजधानी बनने पर पूरी हो गयी। भू- माफिया से सांठ गांठ और दिल्ली नोएडा गुड़गांव की तर्ज पर बहुमंजली इमारतें देहरादून घाटी को जैसे मुंह चिढ़ाती हैं। यह सब उस प्राधिकरण की आंखों के सामने घटा और घट रहा है, जो अस्तित्व में ही इसलिए आया था कि वह देहरादून का नियोजित व वैज्ञानिक तरीके से विकास करे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
धस्माना ने कहा कि एक अप्रैल को आपके विभाग के द्वारा जारी विज्ञापन में देहरादून मास्टर प्लान2041 के संबंध में मांगी गई आपत्तियों व सुझावों के संबंध में देहरादून महानगर की अनेक कालोनियों के संगठनों व आरडब्ल्यूए के पदाधिकारियों ने मुझसे संपर्क किया जो अपने सुझाव व आपत्तियां प्राधिकरण को देना चाहते हैं। आगामी 18-20 वर्षों के लिए आपकी प्रस्तावित योजना के बारे में उल्लेखित बिंदुओं को पढ़ने समझने व उन पर सुझाव या आपत्ति देने के लिए जो समय तय किया गया है। वह निश्चित रूप से अपर्याप्त है। इसलिए आपत्तियों के लिए समय को दो माह के लिए बढ़ाया जाय व प्राधिकरण इसके लिए ऑनलाइन सुझाव भी स्वीकार करें और उसके लिए कोई आधिकारिक ईमेल भी जारी किया जाय। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
कांग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि देहरादून की अधिकांश आवासीय कालोनियों की आरडब्ल्यूए आवासीय क्षेत्रों में बड़ी व्यावसायिक व अन्य गैर आवासीय गतिविधियों के खिलाफ हैं। राजपुर रोड में मसूरी डाइवर्जन से डाकपट्टी राजपुर व ओल्ड मसूरी रोड पर स्थित अधिकांश आवासीय कालोनियों, जीएमएस रोड के दोनों ओर बसी आवासीय कालोनियों, चकराता रोड बिंदाल से पण्डितवाड़ी तक दोनों ओर की कालोनियों में भीतरी इलाकों में गैर आवासीय गतिविधियों के विरुद्ध आम नागरिकों की राय है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने वीसी से कहा कि हमारी मांग है कि देहरादून मास्टर प्लान 2041 पर व्यापक विचार विमर्श व जनता की रायशुमारी होनी चाहिए। देहरादून के पुराने शहरी इलाकों में आबादी का दबाव जिस प्रकार से पिछले ढाई दशकों में बड़ा है उससे नागरिक सुविधाएं जैसे कि सड़कें, पार्किंग, पानी, बिजली आदि आबादी के अनुपात में काफी सिकुड़ गयी हैं। अब शहर इससे ज्यादा आबादी व निर्माण का भार वहन करने की क्षमता नहीं रखता। पुराने शहर से अतिरिक्त बाहरी इलाके में नया सैटलाइट शहर बसाने की अत्यंत आवश्यकता है। इस पर इस मास्टर प्लान में प्रस्ताव होना चाहिए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
महनागर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉक्टर जसविंदर सिंह गोगी ने कहा कि एमडीडीए को प्रस्तावित मास्टर प्लान के बारे में देहरादून की सभी राजनैतिक दलों की सर्वदलीय बैठक व इसके साथ ही देहरादून के सामाजिक व व्यावसायिक संगठनों व्यापार मंडलों , ट्रांसपोर्टरों व विभिन्न सक्रिय संगठनों की बैठकें बुला कर व्यापक विचार विमर्श करना चाहिए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने धस्माना व प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि वे उनके द्वारा ज्ञापन में उल्लेखित बिंदुओं पर गंभीरता से विचार करेंगे। उन्होंने कहा कि मास्टर प्लान जनता के लिए बन रहा है। इसलिए ज्यादा से ज्यादा लोगों के सुझाव आएं। इसके लिए समय भी बढ़ाया जा सकता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति जो मास्टर प्लान पर अपने सुझाव या आपत्तियां दाखिल करना चाहे तो लिखित रूप में या ऑनलाइन प्राधिकरण को भेज सकते हैं। उन्होंने सैटलाइट सिटी के सुझाव को उपयोगी व सार्थक बताया। वीसी से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व महासचिव कमर सिद्दीकी, पार्षद मुकीम अहमद, अभिषेक तिवारी, विक्रांत राठी, प्रमोद कुमार गुप्ता, प्रवीण सिंह कश्यप अनीस अंसारी साथ रहे।

Bhanu Prakash
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भानु बंगवाल
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।


