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July 14, 2026

यूसर्क के हैंड्स ऑन प्रशिक्षण में विद्यार्थियों ने सीखे कृषि की आधुनिक तकनीकी के गुर

उत्तराखंड विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र (यूसर्क), भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान (ICAR) एवं दून पीजी कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर साइंस एंड टेक्नोलॉजी के संयुक्त तत्वाधान में एग्रो ईकोलॉजी विषय पर आयोजित तीन दिवसीय हैंड्स ऑन प्रशिक्षण कार्यक्रम का दून पीजी कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर साइंस एंड टेक्नोलॉजी के सभागार में समापन हो गया। इस दौरान छात्रों को कृषि की आधुनिक तकनीकी की जानकारी दी गई। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

इस अवसर पर कार्यक्रम की मुख्य अतिथि यूसर्क की निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) अनीता रावत ने कहा कि विगत वर्ष से यूसर्क की ओर से वसंत पंचमी पर्व को खेती बाड़ी दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। वसंत पंचमी पर्व के अवसर पर “खेती बाड़ी दिवस” के रूप में यूसर्क की ओर से एग्रो ईकोलॉजी विषय पर तीन दिवसीय हैंड्स ऑन प्रशिक्षण प्रारंभ किया गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

 

उन्होंने कहा कि इसके अंतर्गत सॉइल साइंस, एग्रोनॉमी, फिशरीज, ऑर्गेनिक फार्मिंग, मशरूम, मुर्गीपलन, वर्मी कंपोस्टिंग, पशुपालन आदि को केंद्रित करते हुए उच्च शिक्षा में अध्ययनरत विद्यार्थियों को तीन दिवसीय प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। ये उनके ज्ञान को बढ़ाने के साथ साथ उनके शोध अनुसंधान की दिशा में कौशल विकास (Skill Development) के साथ साथ करियर के लिए भी सहायक होगा। उन्होंने कहा कि आज विज्ञान को समाज और संस्कृति से जोड़ते हुए आगे बढ़ने की जरूरत है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

वैज्ञानिक डॉ ओम प्रकाश नौटियाल ने यूसर्क की विभिन्न वैज्ञानिक गतिविधियों के बारे में विस्तार बताते हुए कहा कि यूसर्क द्वारा राज्य के दूरस्थ स्थित विद्यार्थी तक विज्ञान शिक्षा को तकनीक द्वारा पहुंचाया जा रहा है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए दून ग्रुप ऑफ कॉलेज के चेयरमैन डी एस चौधरी ने इस अवसर पर कहा कि संस्थान वर्ष 2000 से निरंतर कृषि विज्ञान के क्षेत्र में राज्य एवं पूरे भारत के विद्यार्थियों के लिए समर्पण के साथ कार्य कर रहा है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

 

संस्थान के निदेशक डॉ संजय चौधरी ने कहा कि संस्थान में कृषि विज्ञान के अध्ययन से संबंधित आधुनिकतम प्रयोगशालाएं एवं फील्ड से संबंधित उपकरण हैं जो विद्यार्थियों के कौशल विकास के लिए बहुत जरूरी हैं। इसके पूर्व तकनीकी सत्र में भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान (आई सी ए आर) के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ गोपाल कुमार ने ” एग्रीकल्चर डायनामिक्स अंडर चेंजिंग क्लाइमेट कंडीशंस” विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान दिया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

दून पीजी कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर साइंस एंड टेक्नोलॉजी की सहायक प्राध्यापक डॉ पल्लवी भट्ट ने “सॉइल टेस्टिंग: एन इंडिकेटर टुवार्ड्स न्यूट्रीशनल सिक्योरिटी फॉर सस्टेनिंग एग्रोइकोलॉजिकल सिस्टम” विषय पर व्याख्यान दिया। तकनीकी सत्र में डॉ पल्लवी भट्ट ने सभी प्रतिभागियों को मृदा विश्लेषण प्रयोगशाला में मिट्टी का पी एच, ऑर्गेनिक कार्बन, कंडक्टिविटी, पोटैशियम एवं फास्फोरस को निकलना सिखाया। सभी प्रतिभागियों ने अपने अपने मिट्टी के नमूनों की गुणवत्ता का स्वयं परीक्षण किया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

 

अतिथियों का स्वागत एवं धन्यवाद ज्ञापन संस्थान के प्राचार्य डॉ आर आर द्विवेदी ने किया। डीन डॉ मंजूर अहमद डार ने संस्थान की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। परीक्षा नियंत्रक आर के मिश्रा ने कहा संस्थान कृषि विज्ञान भविष्य की जरूरतों को पूर्ण करने में बहुत सी विधाओं से युक्त विषय है। संस्थान के कोऑर्डिनेटर एकेफेमिक्स डॉ रूप किशोर शर्मा ने कहा कि संस्थान की ओर से टिश्यू कल्चर, फॉरेस्ट्री, ऑर्गेनिक फार्मिंग, सॉइल साइंस आदि सभी क्षेत्रों में अग्रणी कार्य किए जा रहे हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

कार्यक्रम समन्वयक वैज्ञानिक डॉ भवतोष शर्मा ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए बताया कि इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में पांच शिक्षण संस्थानों एसजीआरआर यूनिवर्सिटी, जेबीआईटी, दून पीजी कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर साइंस एंड टेक्नोलॉजी, ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी, राजकीय पीजी कॉलेज ऋषिकेश के बॉटनी, एग्रीकल्चर, हार्टिकल्चर, बायोटेक्नोलॉजी विषय के बीएससी, एमएससी स्टूडेंट्स ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में प्रतिभागियों, संस्थान के शिक्षण संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों सहित कुल 75 लोगों द्वारा प्रतिभाग किया गया।