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July 19, 2026

विद्युत संशोधन अधिनियम के विरोध में 23 नवंबर को बिजली कर्मचारियों का दिल्ली में धरना, जागरूकता को मीटिंग जारी

विद्युत संशोधन अधिनियम के खिलाफ देशभर के बिजली कर्मचारी 23 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में धरना देंगे। इसे सफल बनाने के लिए उत्तराखंड में कर्मचारी संगठनों की ओर से जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत मीटिंग का सिलसिला जारी है। कर्मचारी अधिनियम को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि उक्त अधिनियम पावर सेक्टर का निजीकरण करने की दिशा में कदम है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

आंदोलन के क्रम में उत्तराखंड विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा कार्यकारिणी की बैठक 132kv माजरा सब स्टेशन पर आयोजित की गई। इसकी अध्यक्षता प्रदीप कंसल तथा संचालन मोर्चा संयोजक इंसारूल हक ने किया। बैठक में ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ इलेक्ट्रिसिटी एम्पलाइज के राष्ट्रीय स्तर पर विद्युत संशोधन अधिनियम के माध्यम से निजीकरण के विरोध दिल्ली में आयोजित किए जाने वाले धरने पर चर्चा की गई। साथ ही तय किया गया कि 14 नवंबर 2022 को इंस्टीट्यूशन आफ इंजिनियर्स सभागार देहरादून में उत्तराखंड राज्य के बिजली कर्मचारी एक व्यापक स्तर पर सभा करेंगे। सभा को राष्ट्रीय स्तर के कर्मचारी नेताओं में शैलेंद्र दुबे तथा सदरूद्दीन राणा संबोधित करेंगे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

इसके साथ ही 23 नवंबर 2022 को रामलीला मैदान दिल्ली में बिजली कर्मचारियों के धरने के कार्यक्रम में उत्तराखंड से भी भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। बैठक में मोर्चा के सभी घटक संगठनों ने एक एकमत से निर्णय लिया कि विद्युत कंपनियों के निजीकरण के लिए लाए जा रहे विद्युत संशोधन अधिनियम के विरोध में दिनांक 14 नवंबर को उत्तराखंड राज्य के सभी बिजली संगठनों के कार्मिक देहरादून आयोजित कार्यक्रम में भाग लेंगे। साथ ही 23 नवंबर को राज्य के सभी बिजली अभियंता अवर अभियंता तथा कामगार राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन कार्यक्रम में सम्मिलित होंगे। बैठक में में इंजीनियर कार्तिकेय दूबे, केहर सिंह, वीके ध्यानी पंकज सैनी, विनोद कवि, आनंद सिंह रावत, अमित रंजन, रविंद्र सैनी, बीरबल सिंह, बबलू सिंह, पीपी शर्मा, आदि ने विचार रखे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

ये हैं मांगे
-विद्युत कंपनियों का निजीकरण रोका जाए
-कंपनियों को मर्जकर एक बिजली बोर्ड का गठन किया जाए।
-रिक्त पदो पर नियमित भर्ती की जाए।
-समान कार्य समान वेतन नियम लागू किया जाए।
-पेंशनर व नियमित कामगारों को केन्द्र के समान मंहगाई भत्ता दिया जाय। पेंशन की गारंटी दी जाए।
-पुरानी पेंशन नीति लागू की जाए।
-बिना शर्त अनुकम्पा नियुक्ति दी जाए।
-आउटसोर्स कामगार को नियमित किया जाए।