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July 18, 2026

वर्ष 2030 को जेल से छूटेगा मुंबई सीरियल धमाकों का दोषी अबू सलेम, सुप्रीम कोर्ट ने कहा-पुर्तगाल से वादे को पूरा करना बाध्यता

1993 मुंबई सीरियल बम ब्लास्ट मामले का दोषी अबू सलेम आठ साल बाद जेल से रिहा हो जाएगा। इसकी पुष्टि आज हो गई है।

1993 मुंबई सीरियल बम ब्लास्ट मामले का दोषी अबू सलेम आठ साल बाद जेल से रिहा हो जाएगा। इसकी पुष्टि आज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारत सरकार पुर्तगाल सरकार से किए गए वादे का सम्मान करने और 1993 के मुंबई बम धमाकों के मामले में गैंगस्टर अबू सलेम की 25 साल की सजा पूरी होने पर उसे रिहा करने के लिए बाध्य है। सलेम ने कहा था कि 2002 में उसके प्रत्यर्पण के लिए भारत द्वारा पुर्तगाल को दिए गए एक आश्वासन के अनुसार उसकी सजा 25 साल से अधिक नहीं हो सकती है।
न्यायमूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश की पीठ ने कहा कि केंद्र सरकार संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत मिली शक्ति के प्रयोग और सजा पूरी होने को लेकर राष्ट्रीय प्रतिबद्धता के तहत भारत के राष्ट्रपति को सलाह देने के लिए बाध्य है। पीठ ने कहा, ‘जरूरी डॉक्युमेंट्स 25 वर्ष पूरे होने के एक महीने के अंदर आगे बढ़ाए जाएं। वास्तव में सरकार 25 साल पूरे होने पर एक महीने के भीतर सीआरपीसी के तहत छूट के अधिकार का प्रयोग कर सकती है।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने सलेम की दलील नकारी कि उसको पुर्तगाल में जब हिरासत में लिया गया तब से 25 साल गिना जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सलेम को 12 अक्तूबर 2005 को भारत लाया गया था। 25 साल की सजा तभी से शुरू होगी। पांच मई को गैंगस्टर अबु सलेम की उम्रकैद की सजा के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था। सुप्रीम कोर्ट को अबू सलेम की इस याचिका पर फैसला सुनाना था कि 1993 के मुंबई विस्फोट मामले में उसकी उम्रकैद की सजा को घटाकर 25 साल कर दिया जाना चाहिए। क्योंकि भारत सरकार द्वारा उसके प्रत्यर्पण के समय पुर्तगाल गणराज्य को संप्रभु प्रतिबद्धता इस पर दी गई थी कि सलेम की सजा कम की जाए या नहीं।
2005 में पुर्तगाल से भारत लाया गया था सलेम
एक स्पेशल टाडा कोर्ट ने 25 फरवरी 2015 को सलेम को 1995 में मुंबई के बिल्डर प्रदीप जैन हत्या करने के एक अन्य मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। जैन के साथ उनका ड्राइवर मेहंदी हसन भी मारा गया था। मुंबई में 1993 के सीरियल बम ब्लास्ट के दोषियों में से एक सलेम को लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 11 नवंबर, 2005 को पुर्तगाल से प्रत्यर्पित किया गया था।