ललित मोहन गहतोड़ी का गीत- बेटियां

बेटियां…
भीगा भीगा मौसम,
रिमझिम बरखा
बरसे आज तो गली गली।
घिर आई दूर काली घटाएं,
डरी डरी सहमी चली चली।।
भीगे मन भाये, दिल घबराए
नाजों बीच मैं पली पली।
महकूं ऐसे, वैसे जैसे देखो
बाग बगीचे कली कली।।
पापा की दुलारी, मैं बड़ी प्यारी
ममता छांव में बढ़ी चली।
घर भर चमकूं, चहुं चहुं चहकूं
चिड़िया जैसे डाली डाली।।
कुछ मेरे अरमां, थोड़े मेरे सपने
सुनती सबकी कही बली।
त्याग की मूरत, मेरी प्यारी सूरत
एक बता मैं चली चली।।
घर घर खुशियां, ले आती बेटियां
प्यारी प्यारी सी चुली बुली।
ममता छांव में, पल बढ़ करके
हो जाती कब विदा चली।।
कवि का परिचय
नाम-ललित मोहन गहतोड़ी
शिक्षा : हाईस्कूल, 1993
इंटरमीडिएट, 1996
स्नातक, 1999
डिप्लोमा इन स्टेनोग्राफी, 2000
निवासी-जगदंबा कालोनी, चांदमारी लोहाघाट
जिला चंपावत, उत्तराखंड।




